नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह केंद्र सरकार के हुक्म के हिसाब से काम न करें. कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस बात को लेकर खिंचाई की कि वह राजधानी दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस पद के लिए पुलिस डिपार्टमेंट को फंड क्लियर नहीं कर रही है.

सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है केंद्र

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि दिल्ली के लोग टैक्स पेमेंट कर रहे हैं लेकिन क्या उन्हें रिटर्न में सुरक्षा मिल रही है. हर आदमी टैक्स दे रहा है, पता नहीं क्यों केंद्र सरकार दिल्ली में बेहतर पुलिस व्यवस्था में रुचि नहीं दिखा रही. यह सौतेला व्यवहार क्यों है.

‘केद्र के सामने अपनी मांग रखे दिल्ली पुलिस’

हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के फाइनांस मिनिस्ट्री से सवाल किया और कहा कि वह क्यों अभी तक फंड क्लियर नहीं कर पाई है, जबकि होम मिनिस्ट्री ने अतिरिक्त पुलिस पद को सेंक्शन कर दिया है. अदालत ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह केंद्र सरकार से इस मामले में अपनी जरूरत बताए कि उन्हें ज्यादा पुलिस बल की जरूरत है.

‘स्वतंत्र होकर काम करें दिल्ली पुलिस’

हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस को केंद्र सरकार के इशारे पर काम नहीं करना चाहिए उसे स्वतंत्र तरीके से काम करना चाहिए. यह मामला बेहद अहम है. दिल्ली पुलिस को इस मामले में ज्यादा मुखर होने की जरूरत है.

‘जनता पैसे देती है मंत्रालय नहीं’

हाई कोर्ट ने कहा कि अगर मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स इस बारे में प्रस्ताव को पास कर देती है तो कैसे फाइनांस मिनिस्ट्री उसे रोक सकती है. बड़े मॉल का कॉस्ट इससे ज्यादा है. आप लोगों के जेब से रुपया लेते हैं और ये रुपये उन ऑफिसरों के जेब से नहीं आते जो वित्त मंत्रालय में बैठे हुए हैं.

‘मामूली अपराध बड़ा अपराध बन जाता है’

कोर्ट ने कहा कि हम सब इसके लिए पे करते हैं और क्या हम रिटर्न में सेफ्टी पा रहे हैं. क्या दिल्ली में महिलाएं 7 बजे शाम के बाद आराम से घूम सकती हैं ? मामूली अपराध बाद में बड़े अपराध में तब्दील हो जाता है.

क्या है मामला

हाई कोर्ट ने 2013 जुलाई में केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह दिल्ली में अतिरिक्त 14000 पुलिस बल की नियुक्ति करें इसके लिए कुल 450 करोड़ रुपये का बजट बताया गया था. दिसंबर 2015 में केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि उसने 4227 पोस्ट सेंक्शन किया है.