हैदराबाद. केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में पांच दलित छात्रों के निलंबन से न तो उनका कोई संबंध है और न ही उनकी पार्टी का. लेकिन, मंत्री ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजे अपने उस पत्र का बचाव किया, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘समाज विरोधी’ तत्वों की गतिविधियों की जानकारी दी थी. इन पांच छात्रों में से एक, रोहित वेमुला ने खुदकुशी कर ली है. 
 
दत्तात्रेय, विश्वविद्यालय के कुलपति अप्पा राव और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के दो सदस्यों पर रोहित को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है. उन पर अनुसूचित जाति-जनजाति (उत्पीड़न निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं. 
 
केंद्रीय मंत्री और कुलपति के साथ एबीवीपी के नेताओं -सुशील कुमार और विष्णु- के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. मामला साइबराबाद पुलिस कमिश्नरी क्षेत्र के गचिबावली थाने में दर्ज किया गया है. दत्तात्रेय ने अपने खिलाफ दर्ज मामले पर कुछ भी कहने से मना कर दिया है.
 
दत्तात्रेय ने कहा, “मुझसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रतिनिधिमंडल मिला था. इसमें शामिल नेताओं का कहना था कि उन्हें राष्ट्र विरोधी और समाज विरोधी तत्वों ने पीटा है. मैंने उनकी यही बात मंत्रालय तक पहुंचा दी. मुझे नहीं मालूम कि इस पर क्या कार्रवाई की गई.”
बता दें कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज अध्ययन विभाग के सेकेंड के शोध छात्र रोहित वेमुला को रविवार रात शोध छात्रों के छात्रावास में अपने कमरे में छत से लटकता पाया गया था.
 
रोहित की खुदकुशी के बाद से विश्वविद्यालय में तनाव है. विश्वविद्यालय के छात्रों का आरोप है कि पिछले साल अगस्त में एबीवीपी कार्यकर्ताओं से झड़प के कारण अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) से संबद्ध पांच दलित छात्रों को निलंबित कर छात्रावास से निकाला गया था.