नई दिल्ली. दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में मैनजमेंट कोटा खत्म करने के दिल्ली सरकार के फैसले के खिलाफ प्राइवेट स्कूलों की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा है. कोर्ट ने स्कूलों को फिलहाल एडमिशन फॉर्म भरवाने कहा है लेकिन कोटे पर अंतिम फैसला कोर्ट ही लेगा.

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को भेजे नोटिस में कहा है कि फिलहाल एडमिशन की प्रक्रिया स्कूल वैसे ही जारी रखें लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद ही तय होगा कि एडमिशन में मैनेजमेंट कोटा ख़त्म करने के फ़ैसले पर आखिरकार क्या होगा.

25 जनवरी तक मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर 25 जनवरी तक जवाब मांगा है. नोटिस में कोर्ट ने यह भी पूछा है कि सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए क्या कर रही है. क्या सिर्फ प्राइवेट स्कूलों पर नियंत्रण ही सरकार के एजेंडा में है. अगर सरकारी स्कूलों में सुधार होगा तो लोग अपने बच्चे का प्राइवेट स्कूल में दाखिला ही क्यों कराएंगे.

गांगुली कमेटी ने भी इस बात की सिफारिश की थी की प्राइवेट स्कूल की ऑटोनोमी कायम रखना जरुरी है क्योंकि इससे अच्छे प्राइवेट स्कूल और क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा मिलेगा.

सरकार दावा करती है कि मैनेजमेंट कोटा का स्कूल दुरुपयोग करती है लेकिन 2007 के नोटिफिकेशन के बाद से इस आरोप को साबित करने के लिए सरकार के पास कोई सबूत नहीं है. अगर कोई स्कूल फिर भी कोई गड़बड़ी करता है तो सरकार के पास कानून है कि वो उसके खिलाफ करवाई कर सके.

क्या है मामला

स्कूलों में मैनजमेंट कोटा रद्द करने के दिल्ली सरकार के फैसले के खिलाफ प्राईवेट स्कूल हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. दिल्ली के 400 पब्लिक स्कूलों की एक्शन कमेटी ने हाईकोर्ट मे मैनेजमेंट कोटा खत्म करने के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार के पास प्राइवेट स्कूलों को ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार ही नहीं है.

याचिका में दिल्ली सरकार के आदेश को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा गया है कि प्राइवेट स्कूल का मैनेजमेंट ही इसका अधिकार रखता है कि एडमिशन किस आधार पर हो. याचिका में गांगुली कमेटी की सिफ़ारिशों का भी हवाला देते हुए कहा गया है कि प्राइवेट स्कूलो की स्वायत्तता को सरकार किस आधार पर खत्म कर सकती है जबकि 2007 के नोटिफिकेशन मे खुद दिल्ली सरकार और LG  ने स्कूलों में मैनेजमेंट कोटे को 20 फीसदी तक रखा है.

केजरीवाल सरकार ने रद्द किया था मैनजमेंट कोटा

नर्सरी एडमिशन पर बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली सरकार ने एडमिशन के लिए सिर्फ गरीब कोटा रखने का फैसला लिया है. नर्सरी एडिमशन में 25 फीसदी सीटें आर्थिक पिछड़ा वर्ग के लिए रिजर्व रहेंगी जबकि 75 फीसदी सीटें आम लोगों के लिए उपलब्ध रहेंगी.

मैनेजमेंट कोटा सबसे बड़ा घोटाला- केजरीवाल

नर्सरी एडमिशन पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविमद केजरीवाल ने कहा था कि मैनेजमेंट कोटा सबसे बड़ा घोटाला है. उन्होंने कहा था कि अगर स्कूल नहीं माने तो सरकार स्कूलों का अधिग्रहण करेगी. केजरीवाल ने कहा था कि ये अहम फैसला स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया को पारदर्शी और लोगों के फायदे के लिए किया गया है.