कोलकाता. बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि मैं कभी-कभी भावुक हो जाता हूं. तब मुझे अहसास होता है कि मैं राजनीति के लिए नहीं बना. मैं ‘मन की बात’ नहीं करता जो मुझे दूसरों से अलग करता है, यह तो कोई और करता है. मैं तो ‘दिल की बात’ करता हूं.

शत्रुघ्न सिन्हा ने एपीजे कोलकाता साहित्योत्सव में अपनी जीवनी ‘एनिथिंग बट खामोश : दि शत्रुघ्न सिन्हा बायोग्राफी’ का विमोचन करते हुए कहा कि उनके ‘दिल की बात’ उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बना देती है. हालांकि, सिन्हा ने माना कि अक्सर भावनाएं उन्हें अपने वश में कर लेती हैं और यह ‘महंगा पड़ जाता है.

राजनीति छोड़ना चाहता था- शत्रु

उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके सिन्हा ने कहा कि एक ऐसा भी वक्त था जब उन्होंने सोचा था कि राजनीति उनके लिए नहीं है और उन्होंने इसे छोड़ना भी चाहा था. सिन्हा ने कहा कि फिर मैं अपने मित्र और मार्गदर्शक लाल कृष्ण आडवाणी जी के पास गया. मैंने उनसे कहा कि यह नहीं हो सकेगा, खासकर बीजेपी में.

इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी की याद दिलाते हुए कहा कि पहले वे आपकी अनदेखी करते हैं, फिर वे आपका मजाक उड़ाते हैं, फिर वे आपसे लड़ते हैं और फिर आप जीत जाते हैं.

अफसोस कि मैने राजेश खन्ना के खिलाफ चुनाव लड़ा

सिन्हा ने कहा कि कई लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं किस चरण में हूं. मैं उनसे कहता हूं, अंतिम दो चरणों के बीच में. शत्रुघ्न ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा राजनीतिक अफसोस इस बात का है कि उन्होंने बॉलीवुड स्टार राजेश खन्ना के खिलाफ चुनाव लड़ा था.

बिहार में जंगलराज नहीं

बिहार में बीजेपी की करारी हार पर सिन्हा ने कहा कि इसके लिए पूरी पार्टी नहीं बल्कि कुछ लोग जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि मैंने उनसे कहा कि यह न बोलें कि बिहार में ‘जंगलराज’ है. आखिरकार, दूसरी पार्टियों के भी शुभचिंतक और समर्थक हैं और इससे ऐसा लगता है कि आप उन लोगों को ‘जंगली’ कह रहे हैं.