नई दिल्ली. केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी याचिका पर सुनवाई शुरू हो चुकी है तो उस जनहित याचिका को वापस नहीं लिया जा सकता. कोर्ट इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में संविधान के मुताबिक आदेशों का पालन कराना हमें आता है, लेकिन जनता के हितों और अधिकारों से जुड़े मामलों में याचिका वापस नहीं ली जा सकती. एक बार सुनवाई शुरू हो जाने के बाद याचिकाकर्ता तो बदल सकता है, लेकिन सुनवाई बंद नहीं होगी, और ऐसी हालत में कोर्ट एमिकस क्यूरी नियुक्त कर सकता है.

क्या है मामला

साल 2006 में एसोसिएशन की तरफ से सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगाई गई पाबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाया था कि आखिर मंदिर में इस तरह प्रवेश पर पाबंदी कैसे लगाई जा सकती है, जब तक मंदिर को संविधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हो.

याचिका देने वाले वकील को मिल रही हैं धमकियां

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ याचिका दायर करने वाले इंडियन यंग लॉयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नौशाद अहमद खान ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्हें 500 से भी ज़्यादा बार फोन पर याचिका वापस लेने के लिए धमकी दी गई है. ये धमकियां उनको विदेशों से भी मिल रही है. नौशाद ने कोर्ट से सुरक्षा दिए जाने की भी मांग भी की है.