पठानकोट. पठानकोट आतंकी हमले के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए गुरदासपुर के एसपी सलविंदर सिंह ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा है कि मेरी गाड़ी छीनने वाले आंतकियों में से एक ने पुलिस से ही एयरफोर्स बेस का पता पूछा था.

एसपी ने खुलासा किया है कि आतंकी उन्हें गाड़ी समेत अगवा करके ले जा रहे थे तब पुलिस ने एक नाके पर गाड़ी रोकी थी. गाड़ी की बाहर से जांच भी की थी, लेकिन ठीक से तलाशी नहीं ली थी.

आतंकी नहीं जानते थे मैं एसपी हूं

सलविंदर सिंह ने कहा कि सेना की वर्दी में आए आतंकियों ने उन्हें और उनके दोस्तों को एक जनवरी को किडनैप किया गया था. आतंकियों ने उन्हें 45 मिनट तक गाड़ी में ही घुमाया और बाद में उनकी कार को ले गए. उन्होंने कहा है कि आतंकियों को ये नहीं पता था कि मैं एसपी हूं.

आतंकियों के पास थी एके-47

उन्होंने बताया कि आतंकी फौज की वर्दी में थे और उनके पास एके 47 थी. गाड़ी में एसपी के एक दोस्त और कुक भी था. आतंकियों ने राइफल उनके सिर पर सटा रखी थी और साथियों से मारपीट की.

मेरे पास नहीं था कोई हथियार

सलविंदर ने आपबीती सुनाते हुए कहा जिस वक्त ये घटना हुई उस वक्त वो नए साल के मौके पर अपने एक दोस्त के साथ मजार पर मत्था टेकने गए थे. इस वजह से उनके साथ कोई सुरक्षाकर्मी और उनका सरकारी हथियार भी नहीं था.

हिन्दी और उर्दू में बात कर रहे थे आतंकी

एसपी ने बताया कि आतंकियों ने उनका फोन भी इस्तेमाल किया. उन्होंने खुलासा किया कि आतंकी हिंदी और उर्दू में बात कर रहे थे. एसपी ने बताया कि आतंकी जीपीआरएस का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए उन्होंने हमसे रास्ता नहीं पूछा था.

‘18 से 22 साल की उम्र के थे आतंकी

एसपी ने बताया कि सभी आतंकी 18 से 22 साल की उम्र के थे. उनकी ट्रेनिंग इतनी पुख्ता थी कि वह पल भर में गाड़ी की नीली बत्ती उतारते थे और चढ़ाते थे. आतंकियों ने राजेश से पूछा कि गाड़ी किसकी है. एसपी क्या होता है? फिर पूछा, कहीं डीएसपी को तो नहीं कहा जाता ? वर्मा ने कहा, हां. इस पर आतंकवादियों ने वर्मा को गाड़ी तेज चलाने के निर्देश दिए.

एसपी का कहना है कि आतंकी उन्हें एक जगह छोड़कर चले गए थे और उनसे वहीं रूकने के लिए कहा था. उस वक्त उनका कुक मदन लाल भी उनके साथ था. लेकिन आतंकी ड्राइवर राजेश वर्मा को अपने साथ लेकर चले गए थे.

आकाओं ने दिया था मारने का आदेश

आतंकी गाड़ी में ही अपने आकाओं से बात कर रहे थे. हूटर की आवाज सुनकर आका ने बताया था, किसी अधिकारी की गाड़ी है. उसे ढूंढकर खत्म करो. आका का निर्देश मिलते ही फोन पर बात करने वाले आतंकी राजेश को गाड़ी वापस मोडऩे को कहा. जिस स्थान पर एसपी और उसके कुक मदन लाल को खड़े रहने के निर्देश दिए हुए थे वहां पर जब एसपी नहीं मिला तो गुस्साए आतंकियों ने राजेश वर्मा का गला रेत कर उसे मारने की कोशिश की.