गरनाला. पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह का सोमवार को उनके पैतृक गांव गरनाला में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. शहीद गुरसेवक की शव यात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे थे.
 
उन्‍हें श्रद्धांजलि देने के लिए हरियाणा के मिनिस्टर अनिल विज और कैप्टन अभिमन्यु भी पहुंचे. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 20 लाख रुपए की आर्थिक मदद का एलान भी किया है. 
 
कैसे शहीद हुए गुरसेवक सिंह?
गुरसेवक एयरफोर्स की अपनी कमांडो फोर्स गरूण के मेंबर थे. जब शनिवार तड़के आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया, तब गुरसेवक एयरबेस के अंदर सेकेंड सिक्युरिटी लेयर की कमान संभाल रहे थे. उन्हें शुरुआती फायरिंग में गोलियां लगीं. वे फिर भी लड़ते रहे. बेहद जख्मी हालत के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाले रखा था. 
 
‘क्या हुआ, जो एक बेटा शहीद हो गया?’
गुरसेवक सिंह के पिता सुच्चा सिंह का कहना है कि उनका एक बेटा देश के लिए शहीद हो गया तो क्या, देश की सेवा के लिए उनका दूसरा बेटा हरदीप सिंह अभी सेना में है. इतना ही नहीं पोते को भी सैनिक बनाकर देश सेवा के लिए भेजेंगे. 
 
भाई भी है फौज में
गुरसेवक 6 साल पहले एयरफोर्स में भर्ती हुआ था. उनके बड़ा भाई हरदीप भी भारतीय सेना में है और धर्मशाला में तैनात हैं.
 
सितंबर में फैमिली से मिलने गए थे निरंजन
तीन साल पहले यहीं उनकी शादी डॉक्टर केजी राधिका से हुई. वह सितंबर में घरवालों से मिलने आए थे. उनकी दो साल की एक बेटी है, जिसका नाम विस्मया है.