बेंगलुरु. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कर्नाटक दौरे के दूसरे दिन रविवार को 103वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस (आईएससी) का उद्धाटन किया है. उन्होंने वैज्ञानिकों को अनुसंधान और इंजीनियरिंग के लिए ‘पांच ई’ के मंत्र दिए. 
 
मोदी ने कहा, “वैज्ञानिक अगर ‘पांच ई’ के सिद्धांत पर अमल करेंगे तो विज्ञान का प्रभाव बढ़ेगा.” मोदी के दिए ‘पांच ई’ मंत्र में अर्थव्यवस्था (इकॉनॉमी), पर्यावरण (एनवॉयरमेंट), ऊर्जा(एनर्जी), सहानुभूति(एम्पेथी) और न्यायसंगत (ईक्विटी) हैं.
 
मोदी ने अपने भाषण में कहा, “वाजिब और प्रभावशाली उपाय अपनाने पर अर्थव्यवस्था (ईकोनोमी) का मंत्र फलीभूत होगा और ऊर्जा(एनर्जी) का मंत्र तब फलीभूत होगा जब हमारी संपन्नता ऊर्जा पर कम से कम निर्भर होगी. हम जिस ऊर्जा का प्रयोग करेंगे वह हमारे आकाश को नीला और पृथ्वी को हरा-भरा रखेगी.”
 
मोदी ने अन्य दो ‘ई’ का जिक्र करते हुए कहा, “सहानुभूति(एम्पेथी) तब आएगी जब प्रयास संस्कृति, परिस्थिति और सामाजिक बदलाव के अनुकूल होंगे और न्यायसंगत (ईक्विटी) तब होगा, जब विज्ञान समावेशी विकास को बढ़ाएगा और सबसे कमजोर का कल्याण करेगा.”
 
इस मौके पर कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला, राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन मौजूद थे.