नई दिल्ली. शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट में क्या होगा, इसका मजमून पहले ही साफ हो चुका था. आरोपियों के लिए जेल या बेल दोनों विकल्प खुले थे. चुनाव कांग्रेस को करना था और कदम सोनिया और राहुल को बढ़ाने थे.

कोर्ट परिसर में कांग्रेस समर्थकों का इतना जमावड़ा था कि कदम रखना भी मुश्किल हो रहा था पर कोर्ट रूम के अंदर का नजारा कुछ और ही था.

अंदर चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन और सामने खड़े थे सोनिया और राहुल. केस के अन्य आरोपी मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज और सुमन दुबे भी उनके साथ थे.

खराब सेहत और ज्यादा उम्र होने की वजह से मोतीलाल वोरा कुर्सी पर बैठे लेकिन बाकी आरोपी खड़े रहे. केस के छठे आरोपी सैम पित्रोदा विदेश में होने की वजह से कोर्ट नहीं पहुंच पाए.

कब क्या हुआ ?

कोर्ट रूम में ठीक 2 बजकर 51 मिनट पर मामले की सुनवाई शुरू हुई.  कांग्रेस की तरफ से जिरह की कमान संभाली कपिल सिब्बल ने.  उन्होंने कहा कि हमारे सभी मुवक्किल बेहद सम्मानित लोग हैं. इन्हें जमानत मिलनी चाहिए.

देश छोड़कर भाग सकते हैं सोनिया-राहुलस्वामी

इस पर याचिकाकर्ता वकील सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सोनिया और राहुल की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि दोनों नेता देश छोड़कर भाग सकते हैं इसलिए इन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए.

लेकिन जज लवलीन ने कहा कि सभी आरोपी सम्मानित लोग हैं. इनकी गहरी राजनीतिक जड़ें हैं. इस बात की आशंका नहीं है कि ये भाग जाएंगे.

कोर्ट ने स्वामी की मांग खारिज की

इसके साथ जज ने सुब्रह्मण्यम स्वामी की इस मांग को भी खारिज कर दिया कि जमानत के लिए शर्त लगाई जाए. सुनवाई के दौरान सुब्रमण्यम स्वामी ने सैम पित्रोदा की गैर मौजूदगी का भी मुद्दा उठाया.

कोर्ट ने सैम पित्रोदा पर कार्रवाई की मांग भी ठुकराई

उन्होंने कहा कि इस मामले के एक और आऱोपी सैम पित्रोदा कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं, लिहाजा उनके खिलाफ वॉरंट जारी किया जाए. लेकिन कोर्ट ने उनकी ये मांग भी ठुकराते हुए कहा कि अगर वो अगली बार नहीं पेश होते हैं तो कोर्ट कार्रवाई करेगा.

11 मिनट तक चली सुनवाई

करीब 11 मिनट की सुनवाई के बाद सोनिया और राहुल बेल लेकर कोर्ट रूम से बाहर निकले. कोर्ट से निकलकर सोनिया और राहुल सीधे कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.