नई दिल्ली. भारत में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा है कि कुछ लोगों ने मुझ पर विवादास्पद विषयों पर लिखने का आरोप लगाया, लेकिन यह विवादास्पद विषय नहीं है. मेरा मानना है कि बुर्का दमन का प्रतीक है, इसलिए मैं बुर्का के खिलाफ लिखती हूं.

टाइम्स लिटफेस्ट में बोलते हुए तसलीमा ने कहा कि दंगों के लिए लेखकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. दंगाई किताबें नहीं पढ़ते. दंगाई राजनीतिक मकसद से दंगे करते हैं और कर्नाटक में दंगे इसलिए हुए क्योंकि कुछ लोगों ने बुर्का पर मेरे लेख को पसंद नहीं किया था. यह उनकी समस्या थी, मेरी नहीं.

उन्होंने कहा कि वो चरमपंथियों के दबाव में चुप नहीं बैठेंगी और आखिरी सांस तक कट्टरपंथियों और बुरी ताकतों से संघर्ष करती रहेंगी. तसलीमा ने कहा कि मुझे लगता है कि कट्टरपंथी मुझे मारना चाहते हैं लेकिन मैं उनके खिलाफ प्रदर्शन करना चाहती हूं. अगर मैं लिखना बंद कर दूंगी तो इसका मतलब होगा कि वे जीत जाएंगे और मैं हार जाउंगी.

बता दें कि अपनी रचनाओं को लेकर विवादों में रहीं 52 वर्षीय तसलीमा मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों की तरफ से जान से मारने की धमकियों के मद्देनजर 1994 से निर्वासन में रह रहीं हैं.