नई दिल्ली. संसद में मानसून सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने संविधान पर चर्चा के दौरान कहा कि जिन लोगों ने देश में आपातकाल लगाया वो आद संविधान का श्रेय लेना चाहते है. उन्होंने कांग्रेस की तरफ निशाना साधते हुए कहा कि संविधान सभा में श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौजूद थे.

कल संसद में सोनिया गांधी के ‘संसद में वे बैठे हैं जिनका संविधान में योगदान नहीं’ बयान पर जेटली ने कहा कि मैं संविधान बनने के 6 साल बाद पैदा हुआ, इसलिए संविधान में मेरा कोई योगदान नहीं है, लेकिन जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी संविधान सभा के सदस्य थे.

जेटली ने ‘असहिष्णुता’ के मुद्दे पर कहा कि संविधान के रचियता बाबा साहब अंबेडकर को भी कई बार अपमान का सामना करना पड़ा था लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी.

उन्होंने राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर केवल संविधान के निर्माता ही नहीं थे बल्कि एक समाज सुधारक भी थे. जजों की नियुक्ती के मामले में वित्त मंत्री ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर भी चाहते थे कि न्यायपालिका खुद ही जजों की नियुक्ति न करें. न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान के मूल ढाचे में निहित है.

उन्होंने कहा कि आज कोई भी टीवी पर आकर कोई बयान दे देता है तो वह असहिष्णुता का मुद्दा बन जाता है. जेटली ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र मजबूत हुआ है, लेकिन पड़ोसी देश में ऐसा नहीं हुआ.

जेटली ने ये भी कहा कि संविधान के प्रति मोरार जी देसाई को क्रेडिट जाता है, क्योंकि उन्होंने अनुच्छेद-21 में संशोधन करवाया और इस संविधान को नॉन सस्पेंडेबल बनाया.

आपातकाल ने छीनी थी आजादी

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने संविधान पर भाषण देते हुए आपातकाल के दौरान स्थिति का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार को सुनिश्चित करता है, जीवन और आजादी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, 1970 के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सामने आई जब इस अधिकार को छीन लिया गया.

पिछड़े हुए लोगों के अधिकार का सम्मान करेंगे

जेटली ने कहा कि अनुच्छेद 15 एससी, एसटी और सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए लोगों को विशेष अधिकार देता है. हम इन अधिकारों का सम्मान करेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि अगर आज अम्बेडकर जी ने अनुच्छेद 44 (संपत्ति का अधिकार) और अनुच्छेद-48 (गोवध हत्या से संबंधित) का प्रस्ताव दिया होता तो आप लोगों में से कितने लोगों इसे स्वीकार करते ?