नई दिल्ली: वो टीम इंडिया के हारने पर जश्न मनाते हैं. कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करते हैं. पाकिस्तान से पैसे लेकर कश्मीर के नौजवानों को पत्थरबाज़ी के लिए उकसाते हैं. सीधे-सीधे कहें तो वो देश के साथ खुलेआम गद्दारी कर रहे हैं. फिर भी उन्हें वीआईपी की तरह सुरक्षा और सुविधाएं दी जाती हैं.
 
आखिर कश्मीर के अलगाववादियों को सरकारी सुरक्षा क्यों ? देश के गद्दारों पर देश की जनता की गाढ़ी कमाई क्यों खर्च होती है.दुनिया का कोई भी देश अपने गद्दारों को माफ नहीं करता. हर देश में गद्दारी की सज़ा मौत है, लेकिन भारत के जम्मू-कश्मीर में ऐसे लोगों को भी इज्ज़त के साथ सरकारी सुरक्षा में पाला-पोसा जा रहा है, जो खुलेआम देश को बांटने की बात करते हैं.
 
हम बात कर रहे हैं कश्मीर के अलगाववादियों की. पिछले 24 साल से कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करने वाले तथाकथित हुर्रियत नेता रहते भारत में हैं, खाते भारत की रोटी हैं और गाते हैं पाकिस्तान की. सरकार को भी मालूम है कि इनको भारत से गद्दारी करने के एवज में पाकिस्तान से पैसे मिलते हैं.
 
 
देश के किसी कोने में अगर ऐसे गद्दार होते तो सरकार उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा देती. शायद देशद्रोह के जुर्म में इनको मौत की सज़ा भी सुना दी गई होती, लेकिन कश्मीर के अलगाववादियों को सरकार सुरक्षा देती है और उस पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर देती है.
 
 
जम्मू-कश्मीर में जब उमर अब्दुल्ला की सरकार थी, तब ये खुलासा खुद सरकार ने किया था कि अलगाववादियों की सुरक्षा पर हर साल करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. अलगाववादियों की सुरक्षा अब भी कायम है, लेकिन अब सरकार ये बताने को भी तैयार नहीं कि देश के साथ गद्दारी करने और दूसरों को गद्दारी के लिए उकसाने वालों की सरकारी सुरक्षा पर कितना पैसा खर्च हो रहा है.