नई दिल्ली: गोरखपुर में रहना है तो योगी योगी कहना होगा. यही नारा योगी की पहचान थी लेकिन जब योगी का नाम सीएम के लिए फाइनल हुआ यही नारा बदला और समर्थक कहने लगे यूपी में रहना है तो योगी योगी कहना होगा. आदित्यनाथ की छवि कट्टर हिन्दूवादी नेता की रही है. ऐसे में यूपी का मुसलमान खुद को कहां देख रहा है आज इसी पर बड़ी बहस होगी.
 
19 से 20 फिसदी आबादी है यूपी में मुस्लिमों की है. जब बीजेपी चुनाव में उतरी तो उसनें 403 में से एक भी सीट पर किसी मुसलमान उम्मीदवार को नहीं उतारा. सदेश और मंशा साफ थी. बीजेपी यूपी में हिन्दू वोट बैंक को अपने पाले में लाकर चुनाव लडना चाहती थी.
 
उसकी ये रणनीति काम भी आई. यूपी की 403 में से 325 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया और आज यूपी में हिन्दुत्व के बड़े चेहरे को सीएम बनाकर बीजेपी ने यूपी के बाद मिशन 2019 के लिए बीज बो दिए. लेकिन इनस सबके बीच सवाल ये है कि उस 20 फिसदी आबादी का क्या होगा.
 
योगी के हाथ में कमान आते ही यूपी का मुसलमान क्या सोच रहा है. वो भय के माहौल में आ गया है या फिर बीजेपी के सबका साथ सबका विकास के नारे को जेहन में रखकर वो नई उम्मीद के साथ योगी सरकार को देख रहा है.
 
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