नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में दिल्ली के सुभाष मैदान में दशहरा मनाया था. उन्होंने ट्विटर पर विजयादशमी की बधाई दी, लेकिन राम नाम का जयकारा नहीं लगाया. 2015 में मोदी दशहरे के दिन आंध्रप्रदेश में थे. उन्हें तिरुपति में एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया, तिरुपति बालाजी की पूजा की. इस पर कोई विवाद नहीं  हुआ. 
 
इस बार मोदी दशहरा मनाने लखनऊ गए, तो राजनीतिक दलों के कान खड़े हो गए. प्रधानमंत्री के इस गैर राजनीतिक कार्यक्रम को भी यूपी में अगले तीन-चार महीने में होने जा रहे चुनावों से जोड़कर देखा जाने लगा. लखनऊ की ऐशबाग रामलीला के मंच से मोदी ने जय श्रीराम का नारा लगाया तो इसके भी राजनीतिक मायने तलाशे जाने लगे.
 
यूपी में कांग्रेस, बीएसपी और समाजवादी पार्टी ने यात्राओं और रैलियों के जरिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है. अब तक बीजेपी इसमें पीछे दिख रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की दशहरा रैली को बीजेपी के चुनावी अभियान की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है. 
 
देश में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राष्ट्रभक्ति की लहर पहले से दौड़ रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दशहरा भाषण में आतंकवाद को रावण से जोड़ा और भीड़ से जय श्रीराम का नारा लगवाकर इस राजनीतिक अटकल को भी हवा दे गए कि कहीं यूपी में बीजेपी का नारा जय जवान जय श्रीराम तो नहीं होगा.
 
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