पिछले हफ्ते ही रिलीज हुई पैगंबर साहब पर बनी फिल्म ‘मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड’ का चौतरफा विरोध बढ़ता जा रहा है. कुछ ही दिन पहले भारत में इस फिल्म के ख़िलाफ़ फतवा जारी  किया गया था. सऊदी अरब में इस फिल्म का लगातार विरोध बढ़ता जा रहा है. सऊदी अरब के कई लोगों का कहना है कि इस फिल्म में इस्लाम को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. 
 
हालांकि ईरान में इस फिल्म की काफी प्रशंसा हो रही है. अधिकतर सिनेमाहॉल फुल हैं. भारत में फतवा जारी करने वालों मुफ्तियों का कहना है कि पैगम्बर साहब को फिल्म में स्क्रीन में उतारा गया है जो कि इस्लाम में वर्जित है. सुन्नी परंपरा के अनुसार, पैगम्बर को स्क्रीन पर दिखाना वर्जित है. 
 
पैगंबर मुहम्मद की जीवनी पर फिल्म ‘मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड’ पिछले हफ्ते ही रिलीज़ हुई है.171 मिनट की बनी इस फिल्म में  इस फिल्म में पैगम्बर की जिंदगी के बारे में दिखाया गया है. इस फिल्म में पैगम्बर का बचपन से लेकर किशोरावस्था को  दिखाया गया है. फिल्म में 1400 साल पहले की सऊदी अरब की तस्वीर को उकेरा गया है. यह फिल्म ऑस्कर के लिए भी नामित हो चुकी है. इस फ़िल्म की कुल लागत 3. 6 करोड़ यूरो है. निदेशक माजिद माजिदी ने इस फिल्म के लिए सात साल खर्च किये हैं. इससे पहले भी पैगम्बर साहब पर फिल्म मुस्तफा अक्कड ने 1976 में ‘मुहम्मद मैसेंजर ऑफ गॉड’ बनाई थी. 
 
माजिदी ने फिल्म क्यों बनाई? 
फिल्म के डायरेक्टर माजिद माजिदी का कहना है कि ‘पश्चिम में इस्लाम के प्रति डर का जो माहौल बना है, मैं इस फिल्म के जरिए उससे लड़ना चाहता हूं. पश्चिम में इस्लाम की व्याख्या हिंसा और आतंकवाद के रूप में हो रही है.’ इस फिल्म के जरिये इस्लाम की बिगड़ी हुई छवि सुधरेगी.
 
एआर रहमान का म्यूजिक
इस फिल्म में  एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है और इसकी सिनेमाटोग्राफी  ऑस्कर विजेता वितोरो स्तोरारो ने की है. मशहूर ईरानी फिल्म समीक्षक मसूद फेरासती भी फिल्म का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा है कि ‘माजिदी की फिल्म अस्पष्ट और परेशान करने वाली है. फिल्म में  पोशाक, अभिनेता और सेट उस वक्त की संस्कृति में फिट नहीं बैठ रहे हैं.’