रायपुर. क्या आप नदी में भी साइकिल चला सकते हैं…चौकिए नहीं. दुर्ग के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक और छात्रों ने एक साइकिल और आठ सामान्य से तेल के खाली पीपे से ऐसा कर दिखाया है.

‘बेस्ट फ्रॉम वेस्ट’ के जरिए बनी इसकी कुल लागत एक हजार से भी कम है. इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिक विभाग के एचओडी पंकज अग्रवाल ने बताया कि जब उन्होंने गांव वालों की बारिश में परेशानी देखी तो ऐसा कुछ बनाने का विचार आया. खर्च पर ध्यान देना था इसलिए बजट पर नजर रखी और छात्र प्रतीक, एन रविकिरण, रितेश विनोद कुमार देवांगन और मयंक अग्रवाल के साथ मिलकर तैरने वाली साइकिल बनाई. अब दुर्ग के कलेक्टर इसकी प्रदर्शनी लगाएंगे.

कैसा है डिजाइन?

इस साइकिल को बनाने में आठ खाली पीपे और कुछ कबाड़ के सामान लगे हैं. साइकिल में दो सवारी के वजन को ध्यान में रखकर आठ पीपे लगे. इन्हें दोनों तरफ बांधा गया है. हैंडिल और करियर के बीच दो रॉड लगाई गई है. पिछले पहिए में पतवारें हैं. पानी में पतवारें पैडल मारते ही तेजी से चलती हैं और साइकिल बढ़ती है. डायनेमो से अटैच हेडलाइट भी लगी है, ताकि रात में चल सके. जरूरत पड़ने पर बैटरी से भी चला सकते हैं.