नई दिल्ली: शादी के तुरंत बाद कई जोड़े इस बात से परेशान रहते हैं कि तुरंत प्रेग्नेंसी का चक्कर ना पड़ जाए. आमतौर पर इससे बचने के लिए महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सहारा लेती हैं. लेकिन जरुरी नहीं कि ये दवा हर किसी को सूट करे और साथ ही ये 100% सेफ भी नहीं मानी जातीं. हालांकि इन गोलियों से मुंह पर होने वाले दाने और पीरियड के दौरान होने वाले दर्द से थोड़ी राहत भी मिलती है.
 
डेनमार्क में हुए एक हाल के शोध में पता चला है कि गर्भनिरोधक गोलियों से डिप्रेशन का खतरा रहता है. हम आपको बता रहे हैं ऐसे चार आसान तरीके जिनकी मदद से गर्भनिरोधक गोलियों के बिना भी अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है. साथ ही ये सेफ भी हैं. 
 
जानिए क्या हैं उपाय
1- पीरियड्स और फर्टिलिटी के बारे में बताने वाला एप : हॉलि ग्रीग-स्पैल ने अपनी किताब ‘स्विटिनंग द पिल’ लिखने के दौरान गर्भ निरोध के हार्मोन्स पर सालों तक काम किया है. ये बताती हैं कि दो तरह की गर्भनिरोधक गोलियां होती हैं. एक जिसमें एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन दोनों तरह के हार्मोन होते हैं. ये दोनों ही हार्मोन महिलाओं में पाए जाते हैं, लेकिन इसकी मात्रा बढ़ने के बाद ये अंडाशय से अंडाणुओं को निकलने से रोक देते हैं.
 
2- फर्टिलिटी ऐप : अब ऐप की मदद से आप अपनी फर्टिलिटी साइकिल पर नज़र रख रकते हैं. इसके लिए यूजर्स को हर रोज अपने तापमान का हिसाब रखना होता है. हॉलि ग्रीग-स्पैल इस ऐप के बारे में बताती हैं, ‘सिर्फ तीस सेकेंड में पता चल जाता है कि कब मैं फर्टाइल हूं और कब नहीं. जब मैं फर्टाइल रहती हूं तब मैं यह तय कर सकती हूं कि मैं सेक्स करूं या ना करूं. या फिर सेक्स के लिए कंडोम का इस्तेमाल करूं.’
 
3- हाई ब्लड-प्रेशर और मोटापे से ग्रसित महिलाएं एस्ट्रोजन नहीं ले सकतीं. इसलिए इन्हें एक दूसरे तरह के पिल दिए जाते हैं. इसमें सिर्फ प्रोजेस्टेरोन होता है जिसे ‘मिनी पिल’ कहते हैं. ये दोनों ही तरह के पिल 99 फीसद प्रभावी होते हैं. फैक्लटी ऑफ सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टीव हेल्थकेयर की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सारा हार्डमैन का कहना है, ‘अगर एक हार्मोन के कारण कोई साइड इफेक्ट है तो कोई जरूरी नहीं कि दूसरे हार्मोन के साथ भी हो.’
 
4- मर्दों के लिए पिल : जितनी पुरानी महिलाओं की गर्भनिरोधक गोली है उतनी ही पुरानी मर्दों की गर्भनिरोधक गोली भी है. यूनिवर्सिटी ऑफ वोल्वरहैंपटन के शोधकर्ताओं ने उम्मीद जगाई है. उनका कहना है कि उनके पास इस दवा का सही फार्मूला है जो कारगर साबित होगा. उन्होंने एक खास तरह का पेप्टाइड (प्रोटीन) विकसित किया है जो शुक्राणु की गति को धीमा करता है. इसे पिल, स्प्रे या फिर क्रीम के रूप में बनाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल सेक्स के कुछ घंटे पहले करना होगा.