वाशिंगटन. सेहत के नाम पर अगर आप भी कोई साबुन ये देखकर खरीदते हैं कि ये हमें बैक्टेरिया से बचाता है या नहीं तो सावधान हो जाइए. अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कंपनियों के इस झूठ की पोल खोल दी. 
 
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एफडीए ने अपने रिसर्च में पाया है कि ये एंटी बैक्टेरियल और एंटी फंगल साबुन हमें फायदा के बजाए नुकसान पहुंचाते हैं. एफडीए ने 19 केमिकल के नाम जारी किए हैं. कंपनियों को ये साफ कहा गया है कि उनके जिस भी साबुन में इनमें से किसी भी केमिकल का प्रयोग होता है उन उत्पादों की बिक्री बंद कर दें. 
 
 
क्या कहता है नया नियम
ये नया नियम 2013 में ही प्रस्तावित हुआ था. इसके तहत कंपनियों को अपने साबुन को बिना उन रसायनों के बाजार में लाने के लिए  एक साल का समय दिया गया है.
 
एफडीए के सेंटर फॉर ड्रग इवैल्यूएशन एंड रिसर्च के डायरेक्टर डॉ जेनेट वुटकॉक ने प्रेस रिलीज में बताया कि- ‘उपभोक्ता किसी भी उत्पाद को ये सोचकर खरीदता है कि ये साबुन किटाणुओं से लड़ने में ज्यादा सक्षम हैं और हमारी सेहत के लिए जरुरी हैं. पर सच ये है कि एंटी बैक्टेरियल साबुन साधारण साबुनों की तुलना में ज्यादा असरदार होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.’
 
 
क्या हैं नुकसान
डॉ वुटकॉक ने कहा कि- ‘वास्तव में, कुछ आंकड़ों से पता चलता ये एंटी बैक्टेरियल उत्पाद लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर फायदा से अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं’. 
 
ट्राइक्लोजन और ट्राइक्लोकार्बन दो ऐसे केमिकल हैं जिन्हें एंटी बैक्टेरियल साबुनों में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है. स्टडी में ये पाया गया कि ये केमिकल शरीर में हारमोन्स पर असर डालते हैं और कई तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं. 
 
इनके इस्तेमाल से बांझ होने का खतरा हो सकता है, दिमाग के विकास को रोकती है और दिल को भी नुकसान पहुंचाती है. इसके साथ ही साथ इनके ज्यादा इस्तेमाल से  बैक्टेरिया के एंटीबायोटिक रोधी हो जाने का भी खतरा है.