नई दिल्ली. चाय आज हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. आप हर रोज सुबह की चाय की चुस्की का मजा लेने से शायद ही चूकते होंगे. कभी सुबह की चाय तो कभी दोपहर बाद की चाय. दफ्तर में काम के बीच होने वाला टी ब्रेक तो कभी लॉन में बैठकर सुकून से चाय का लुत्फ उठाना हर दूसरा इंसान चाहता है.
 
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इतना ही नहीं लोग छोटे-बड़े रेस्तरां, घरों और आलीशान होटलों में, आपको हर जगह चाय पीते हुए लोग मिल जाएंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चाय पीने के तरीके से आप किसी इंसान की हैसियत का पता भी लगा सकते हैं.
 
दरअसल, यह हम नहीं कह रहे हैं. मशहूर मानवशास्त्री केट फॉक्स ने अपनी क़िताब, ‘वाचिंग द इंग्लिश’ में इस बारे में काफ़ी कुछ लिखा है.
 
कामगार लोग पीते हैं कड़क ब्लैक Tea
फॉक्स ने अपनी किताब में लिखा है कि कड़क ब्लैक टी अक्सर कामगार लोग पीते हैं. जैसे-जैसे समाज के ऊंचे दर्जे के लोगों की चाय को देखते हैं तो उनका स्वाद हल्का होता जाता है.
 
‘चीनी डालकर पीने वाले लोग निचले तबके से’
इसी तरह दूध और चीनी का चाय में अपना रोल होता है. चाय में चीनी डालकर पीने का मतलब होता है कि ऐसे लोग समाज के निचले तबके से आते हैं. यहाँ तक कि कम चीनी वाली चाय पीने का मतलब भी यही निकाला जाता है.
 
2 चम्मच चीनी कामगार तबके की पहचान 
अगर आप चाय में चीनी डालकर पीते हैं तो इस तरह की चाय से आप हद से हद निम्न मध्यम वर्ग के माने जा सकते हैं. अगर आप दो चम्मच चीनी चाय में डालते हैं तो आप कामगार तबके से आते हैं.
 
लैपसैंग सोउचॉन्ग चाय पीने वाले मध्यम वर्ग
बिना चीनी और दूध वाली लैपसैंग सोउचॉन्ग चाय पीने का मतलब है कि आप मध्यम वर्ग से आते हैं और ऊंचे तबके के दिखने की कोशिश कर रहे हैं.
 
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चाय पीते हुए रिश्ते भी बनते हैं
इतना ही नहीं केट फॉक्स यह भी कहती हैं कि चाय कई लोगों के लिए मुश्किल हालात से निकलने का जरिया है. ऐसे लोग जब भी खुद को किसी नाज़ुक हालत में पाते हैं, वो चाय बनाने लगते हैं और ऐसा उनके साथ अक्सर होता है. कई बार चाय पीते हुए नए रिश्ते भी बनते हैं.