नई दिल्ली. पर्यावरण दिवस पर जाने माने वैज्ञानिक ने दावा किया है कि इस साल या फिर अगले साल आर्कटिक समुद्र की बर्फ खत्म हो सकती है. अगर ऐसा हुआ तो एक लाख साल में पहली बार होगा. इस साल 1 जून तक आर्कटिक समुद्र के केवल 11.1 मिलियन स्क्वेयर किलोमीटर इलाके में ही बर्फ बची है. पिछले 30 साल का औसत 12.7 मिलियन स्क्वेयर किलोमीटर था. यह अंतर पूरे यूनाइटेड किंगडम को 6 बार जोड़ने के बराबर है. बता दें कि पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के आसपास के इलाके को आर्कटिक कहा जाता है. 
 
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‘इस साल रिकॉर्ड लो लेवल तक पहुंच जाएगा’
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के पोलर ओशन फीजिक्स ग्रुप के हेड प्रोफेसर पीटर वैडहैम्स ने कहा है कि ताजा डाटा के अनुसार उनके उस अनुमान की पुष्टि हुई है, जो कि उन्होंने 4 साल पहले लगाया था. उन्होंने कहा कि मेरा अनुमान है कि आर्कटिक की बर्फ गायब हो सकती है. इस साल के सितंबर तक यहां 10 मिलियन वर्ग किलोमीटर के इलाके से भी कम बर्फ रह जाएगी. पीटर ने कहा कि यदि बर्फ पूरी तरह गायब नहीं भी होती तो यह संभव है कि इस साल रिकॉर्ड लो लेवल तक तो पहुंच ही जाएगा.
 
 
मौसम पर होगा जबरदस्त असर 
आर्कटिक समुद्र पर 1 लाख से 1 लाख 20 हजार साल पहले आखिरी बार बर्फ खत्म हुई थी. ध्रुवीय इलाके में तेजी से बढ़ते तापमान के कारण ये स्थिति पैदा हो सकती है. इसी से ब्रिटेन में बाढ़ के हालात हैं और अमेरिका में बेमौसम तूफान भी आ रहे हैं. अगर बर्फ खत्म होती है तो दुनियाभर में तापमान बढ़ जाएगा और मौसम में कई तरह के आकस्मिक बदलाव होंगे. ग्लोबल वॉर्मिंग की स्थिति भी बदतर हो जाएगी.
 
 
कहां तक फैला है आर्कटिक क्षेत्र
बता दें कि आर्कटिक क्षेत्र में आर्कटिक महासागर, कनाडा का कुछ हिस्सा, ग्रीनलैंड (डेनमार्क का एक क्षेत्र), रूस का कुछ हिस्सा, संयुक्त राज्य अमेरिका (अलास्का), आइसलैंड नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैण्ड शामिल हैं.
 
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