नई दिल्ली. हर सक्सेसफुल आदमी के पीछे एक महिला का हाथ होता है. ये बात महिलाओं पर भी लागू होता है. आज के समय में महिलाओं के सक्सेस के पीछे उसके पार्टनर का होता है. एक ऐसा पार्टनर जो उसके घर के कामकाज में हाथ बढ़ाता है, बच्चों को संभालने में उसकी मदद करता है.
 
सीनियर रिलेशनशिप साइक्लोजिस्ट डॉ. नयमत बावा का कहना है ‘मैं कई ऐसे आदमियों से मिला हूं, जो परिवार के काम-काज में हाथ बटाते हैं. उन्हें घर का काम करने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती है. इतना ही नहीं महिलाओं को लेकर लोगों की सोच भी बदली है. महिलाओं के मल्टी टास्किंग लाइफस्टाइल को देखते हुए, उनकी इज्जत परिवारों में ज्यादा बढ़ी है.
 
स्टे-एट-होम नाम से एनजीओ चलानें वाले लोगों का कहना है कि ‘यह बच्चों पर डिपेंड करता है कि वह अपने पिता को घर पर रहने के लिए कितना रिक्वेस्ट कर पाते हैं या फिर कुछ ऐसा करें जिससे उनके पिता घर रह कर उनकी देखभाल करें’.
 
स्टे-एट-होम-डैड से जुड़े बालचन्द्रन का कहना है ‘जब मैनें यह डिसाइड किया कि मैं घर रहकर अपनें बच्चों की देखरेख करुंगा. तब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था, मैं बिल्कुल कन्फयूजड था. फिर मुझे एहसास हुआ कि चीजें बदलनी चाहिए और किसी ना किसी को तो शुरुआत करनी होगी. लोग क्या कहेंगे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता’.
 
चीफ साइक्लोजिस्ट स्मृति सव्हाने का कहना है ‘जैसे महिलाओं नें अपने कदम बाहर की तरफ बढाए हैं, वैसे ही अगर आदमी चाहे तो अपने कदम अंदर कर सकता है. लेकिन इसके लिए आदमी को अपनी सोच बदलने की जरुरत है.
 
पहले तो आदमी को अपने दिल-ओ-दिमाग से इस बात को निकालना होगा कि वह आदमी है, और वह घर का काम नहीं कर सकता. ऐसे में एक आदमी को अपने सोच को फ्री करना होगा कि वह घर के कोई भी काम कर सकता है बिना किसी संकोच के. तभी वह घर और बच्चे संभाल पाएगा.
 
दुसरी तरफ ‘महिलाओं को भी अपने पति से बेझिझक किसी काम को करने के लिए कहने की जरुरत है. लेकिन हां महिलाओं को इसमें थाड़ा पेशेंस दिखाने की जरुरत है. अगर आपके पति के काम करने से आपका कुछ बोझ हलका हो जाता है, तो इसमें बुरा ही क्या है’.