नई दिल्ली. बदलती जीवन शैली में सुविधाओं की जगह बढ़ी है लेकिन ये कई परेशानियों को साथ लेकर आई है. ऐसी ही परेशानियों में एक है इन्‍फर्टिलिटी. इन्फर्टिलिटी पर लोगों का ध्यान जब तक जाता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है.
 
24 घंटे चलने वाले दफ्तरों में लगातार शिफ्ट में काम करने वालों को मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. टाइम से ना सोने और जगने से अनिद्रा, डिप्रेशन जैसी बीमारी आम हैं.
 
प्रदूषण और टाक्सिन्स ने इन्फर्टिलिटी के मामले 45 से 48 प्रतिशत तक बढ़ा दिये हैं. जीवन शैली और खान-पान की गलत आदतें भी इन्फर्टिलिटी की तरफ बढ़ाती हैं. पेस्टिसाइड्स का फूड चेन में आना हार्मोन को प्रभावित करता है.
 
विवाह और बच्चे की प्लानिंग में देरी
तरक्की और सफलता की चाह में पुरूष और महिला 20-30 साल की उम्र में विवाह नहीं करना चा‍हते. ज्यादा उम्र में विवाह होने पर बच्चे की प्लानिंग में और टाइम लग जाता है. महिलाएं भी आत्मनिर्भर होने के बाद करियर को थोड़ा और समय देना चाहती हैं.
 
डॉक्टरों के अनुसार अधिक उम्र में विवाह होने से स्त्रियों में ओवम की क्वालिटी प्रभावित होती है और इन्‍हीं कारणों से इन्फर्टिलिटी की संभावना भी बढ़ जाती है.
 
उम्र के साथ बढ़ता हाइपरटेंशन
 
आजकल अधिकांश महिलाों में फाइब्रायड बनने की शिकायत आ रही हैं. एन्डोमैंट्रियम से संबंधित समस्याओं से भी उन्हें जूझना पड़ रहा है. उम्र बढ़ने के कारण हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं भी आती हैं और इससे भी महिलाओं में फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है.