नई दिल्ली: रजिया सुल्तान दिल्ली सल्तनत की पहली और आखिरी सुल्तान थीं लेकिन पंजाब के बठिंडा में स्थित किला मुबारक में 1239 ईसवीं में रजिया सुल्तान को कैद कर लिया गया था. भाटी राजपूत राजा बीनपाल ने इस किले का निर्माण लगभग 1800 साल पहले करवाया था. रजिया सुल्तान के प्रेमी याकूत को मारक गर्वनर अल्तुनिया ने उन्हें कैद किया था. रजिया सुल्तान एक धार्मिक सुल्तान भी थी, उन्होंने कई स्कूल और शिक्षा केंद्र खुलवाए और साथ ही कई लाइब्रेरी भी जहां कई प्राचीन किताबों का संग्रह भी रखा गया था. रजिया ने 1236 से 1240 तक दिल्ली की सल्तनत पर शासन किया. रजिया का जन्म सन 1205 में हुआ. पिता शम्स-उद-दिन इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद रजिया को दिल्ली का सुल्तान बनाया गया. रजिया सुल्तान का नाम हर कोई बचपन से सुनता आ रहा है. 14 अक्टूबर को रजिया सुल्तान की पुण्यतिथि है. ऐसे में आज हम आपको रजिया सुल्तान से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें बताएंगे. रजिया केवल किस्से कहानियों में मिलती हैं या फिर कमाल अमरोही की फिल्म में, एक सीरियल भी बना. ऐसे में कमाल की फिल्म ने रजिया के चाहने वालों को और भी कन्फ्यूज कर दिया. ऐसे में रजिया से जुड़े दो सवाल हैं, जिनका जवाब ठीक से आज भी नहीं मिलता. पहला ये कि उनकी असली कब्र कौन सी है, दूसरी ये कि क्या वो बाइसेक्सुअल थीं?
 
रजिया की तीन कब्र, असली कौन सी?
आखिर ये सवाल उठे कैसे? रजिया सुल्तान का नाम तो हर कोई बचपन से पढ़ता आ रहा है, लेकिन उसकी निशानी कोई नहीं मिलती, जैसे शाहजहां का ताजमहल और कुतुबुद्दीन ऐबक की कुतुब मीनार. ऐसी कोई मशहूर इमारत नहीं मिलती, जिसको सीधे रजिया सुल्तान से जोड़ दिया जाए. लोगों ने सोचा कुछ ना होगा तो उसका मकबरा ही होगा. आखिर दिल्ली की पहली और आखिरी महिला सुल्तान थी वो. जब लोगों ने उसका मकबरा ढूंढने की कोशिश तो एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन तीन निकले. एक दिल्ली के तुर्कमान गेट में, दूसरा हरियाणा के कैथल में और तीसरा राजस्थान के टोंक में. अब कैसे पता चले कि सही कौन सा है? ऐसे ही भले ही इतिहास की किसी भरोसमंद किताब में रजिया के बाइसेक्सुअल रिलेशंस के बारे में कुछ नहीं लिखा गया. लेकिन कमाल अमरोही की फिल्म में उनके परवीन बॉबी के साथ सींस के बाद रजिया के बारे में ऐसा सोचने को मजबूर कर दिया.
 
इन सवालों की थोड़ी और गहराई से छानबीन करेंगे, लेकिन पहले जानिए कि रजिया सुल्तान आखिर बला क्या थीं. जब पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को हराने के बाद भी छोड़ने की भूल कर दी, तो उसने फायदा उठाया, दोगुनी ताकत और नई रणनीति से चौहान को हराकर मार दिया और दिल्ली पर कब्जा कर लिया. गौरी ने अपने गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को गद्दी पर बैठाया और वापस लौटते वक्त किसी युद्ध में दिल्ली के पास ही मारा गया. किसने मारा इतिहास बताता नहीं, पृथ्वीराज रासो में दावा किया गया है कि पृथ्वीराज चौहान ने मारा था.
 
 
ऐबक ने अपनी बहन की शादी अपने खास गुलाम इल्तुतमिश या अल्तमश से कर दी और उन दोनों की बेटी हुई रजिया, जो बाद में रजिया सुल्तान कहलाई. हालांकि अचानक रजिया के भाई नासिरुद्दीन महमूद की मौत हो गई तो इल्तुतमिश ने रजिया को अगले शासक के तौर पर घुड़सवारी, तलवारबाजी आदि की ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी, घुड़शाला का प्रभारी बनाया अबीसीनियाई गुलाम याकूत को. घुड़सवारी सिखाते सिखाते याकूत रजिया के निकट आ गया. घोडे पर रजिया को हाथ से सहारा देकर चढ़ाने की वजह से वो कई तुर्क सरदारों के निशाने पर भी आ गया.
 
रजिया की एक सौतेली मां शाह तुर्कान भी रजिया के खिलाफ थी और उसके सौतेले भाई रुक्नुद्दीन फिरोज और बहराम शाह भी. वो योग्य नहीं थे, इसलिए एक दिन इल्तुतमिश ने रजिया को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. लेकिन याकूत और रजिया के रिश्तों की खबर से तुर्क सरदार परेशान थे. जैसे ही 1236 अप्रैल में इल्तुतमिश की मौत हुई, उन सरदारों ने शाह तुर्कान से हाथ मिलाकर उसके बेटे रुक्नुद्दीन फिरोज से हाथ मिला लिया और उसे बादशाह घोषित कर दिया. लेकिन 6 महीनों के उसके अय्याश शासन से जनता ही नहीं तुर्क सरदार और अमीर भी त्रस्त हो गए औऱ 9 नवम्बर को दोनों मां बेटे को मार डाला गया. फिर रजिया को सुल्तान बनाया गया. रजिया ने पुरुषों जैसे कपड़े पहनने शुरू कर दिए.
 
लेकिन रजिया के लिए राह बड़ी मुश्किल थी, हर जगह कोई ना कोई सूबेदार या गर्वनर विद्रोह कर रहा था. रजिया कभी यहां तो कभी वहां, विद्रोह दबाने के लिए घूम रही थी. इन्हीं में से एक भटिंडा का गर्वनर अल्तूनिया रजिया का पुराना दोस्त और वफादार था. उसको भी याकूत से रजिया का साथ भा नहीं रहा था. उसने भी विद्रोह कर दिया. वो रजिया को मन ही मन पसंद करता था. याकूत के साथ रजिया ने उस पर हमला बोल दिया, लेकिन इस हमले में याकूत मारा गया और अल्तूनिया ने रजिया को बंदी बना लिया और शर्त रख दी कि तभी आजादी मिलेगी जब शादी को रजामंद होगी. याकूत मारा गया था, अल्तूनिया अब सबसे ताकतवर सरदार था और रजिया के बचपन का दोस्त भी. तो रजिया मान जाती है, इधर रजिया का एक और सौतेला भाई बहराम शाह दिल्ली पर कब्जा कर लेता है. भटिंडा से अल्तूनिया और रजिया निकलते हैं फिर से कब्जा करने.
 
 
दिल्ली में उनको बहराम की सेनाओं से तगड़ी शिकस्त मिलती है और दोनों भाग निकलते हैं. कुछ इतिहसकारों ने दावा किया है कहीं कैथल के पास उन दोनों को जाटों ने घेर लिया और मार डाला तो कुछ लोग दावा करते हैं कि उन्हें टोंक में घेर कर मारा गया. ऐसे में तीनों जगह उनके मकबरों के दावे किए गए हैं. दिल्ली के तुर्कमान गेट में तो दो कब्रें हैं, जिनमें से छोटी कब्र याकूत की बताई जाती है, जबकि होनी अल्तूनिया की चाहिए, क्योंकि याकूत तो भटिंडा की जंग में अल्तूनिया के हाथों मारा गया था. टोंक में भी जो मजार मिली है, उस पर ‘सल्तनत ए हिंद रजियाह’ लिखा मिला है तो कैथल की कब्र की एक पुरानी पेंटिग मिली है, जिसमें वो कब्र ठीक ठाक हालत में है. कैथल की कब्र पर तो वायसराय लिनलिथगो 1938 में रजिया की कब्र पर गया भी था और उसको दुरुस्त करने के लिए एक ग्रांट भी मंजूर की थी. दूसरे विश्व युद्ध के चलते वो ग्रांट नहीं पहुंच पाई थी. तो ये विवाद आज तक जारी है.
 
क्या बाइसेक्सुअल थीं रजिया सुल्तान?
इसी तरह एक और सवाल ‘रजिया सुल्तान’ के डायरेक्टर कमाल अमरोही ने अपनी फिल्म में दिखाया कि कैसे रजिया सुल्तान के रोल में हेमा मालिनी अपनी सहेली परवीन बॉबी को बोट में एक गाने के दौरान लिप किस करती हैं. बॉलीवुड की ये पहली फिल्म थी, जिसमें लेस्बियन जैसा एंगल दिया गया. हालांकि कैमरे पर ये दिखा कि बोट में लेटी हेमा मालिनी के चहते पर परवीन बॉबी झुकती हैं औऱ एक हाथ से कैमरे के आगे हाथ वाला पंखा कर देती है, यानी लिप किस सांकेतिक था. लोग इसे हेमा और बॉबी का लिप किस ही समझें, इसके लिए अगले सीन में बोट चला रही दो दासियों में से एक को हंसते-शर्माते दिखाया, तो दूसरी को उसे इशारों इशारों में चुप करते दिखाया, साथ ही गला काटने की चेतावनी भी. साफ था कि कमाल अमरोही दिखाना चाहते थे कि रजिया सुल्तान के अपनी सहेली से जिस्माना रिश्ते थे.
 
चूंकि अब तक इतिहास में ये ही पढ़ते आए थे कि उसके अबीसीनियाई हब्शी याकूत से रिश्ते थे, बाद मे अल्तूनिया से भी बने, शादी भी की, लेकिन अगर सहेली से भी था तो वो बाइसेक्सुल होंगी. हालांकि उस वक्त बॉलीवुड की सबसे मंहगी फिल्म करार दी गई कमाल अमरोही की रजिय सुलतान बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई, तो लोगों के बीच इस मुद्दे को ज्यादा हवा नहीं मिली. इस फिल्म में याकूत के रोल में धर्मेन्द थे और अल्तूनिया के रोल में विजेन्द्र घाटगे. इस फिल्म के लिए 192-83 में कमाल साहब ने 4 से 10 करोड़ के बीच खर्च किया था, जो काफी ज्यादा था. हॉलीवुड से वो स्पेशल इफैक्ट्स के लिए स्टार वॉर्स और सुपरमैन बनाने वाले पाइनवुड स्टूडियोज के रॉय फील्ड्स को लाए थे. जाहिर है उन्हें फिल्म से ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन फिल्म मे जरूरत से ज्यादा उर्दू और धर्मेन्द्र के काले लुक और कमजोर रोल ने लोगों का स्वाद खराब कर दिया, हेमा को भी लोगों ने उस रोल के लिए फिट नहीं पाया.
 
ये 14 अक्टूबर 1240 का दिन था, जिस दिन रजिया सुल्तान अल्तूनिया के साथ खाक में मिला दी गईं. रजिया मुश्किल से चार साल दिल्ली की सुल्तान रह पाईं और इस दौरान केवल विद्रोहियों से ही जूझती रहीं, एक जगह से दूसरी जगह विद्रोह दबाने भागती रहीं. ऐसे में कोई बड़ी बिल्डिंग या बड़ा सुधार उनके खाते में दर्ज नहीं है, लेकिन उस दौर में बिना पिता के इस्लामिक समाज में इस मुकाम पर पहुंचना कितना अहम था, ये इस तथ्य से समझ सकते हैं कि रजिया के बाद दिल्ली को दूसरी सुल्तान नहीं मिली. क्वीन विक्टोरिया नाम की रानी थीं, तो इंदिरा गांधी ने पूरा देश संभाला और शीला दीक्षित के हिस्से में दिल्ली सल्तनत का काफी छोटा हिस्सा आया.