नई दिल्ली: 28 दिसम्बर 2013 से 14 फरवरी 2014 की 49 दिन तक सत्ता में रहने के बाद फिर से 2015 में दिल्ली में सत्ता में लौटी थी. इस बार जो वो लौटी तो पूर्ण बहुमत ही नहीं बल्कि विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया. 70 में से 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
 
इस चुनाव के समय ने दिल्ली की जनता से कई वादे किए थे. इनमें से एक वादा ये भी था कि वो पांच साल दिल्ली के सीएम रहेंगे और कहीं और नहीं जाने वाले. क्योंकि इसके पहले 2014 में उन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली की जनता को ठेंगा दिखा था. 
 
लेकिन आज फिर केजरीवाल उसी इतिहास को दोहराते नजर आ रहे हैं. आज केजरीवाल के डिप्टी और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जो कह दिया उससे लग रहा है कि पंजाब जीतने के लिए केजरीवाल दिल्ली की कुर्सी छोड़ देंगे. के मुताबिक लोग में आम आदमी पार्टी को ये सोचकर वोट दें कि केजरीवाल ही सीएम होंगे. 
 
ऐसे में कई अहम सवाल खड़े हो जाते हैं. में आज के सवाल क्या केजरीवाल दिल्ली का मुख्यमत्री पद छोड़ पंजाब की कुर्सी संभालेंगे? क्या पंजाब जीतने के लिए दिल्ली की जनता से किया वादा तोड़ देंगे केजरीवाल? क्या पंजाब में AAP की हालत बिगड़ रही है जो केजरीवाल को खुद को उतारना पड़ रहा है मैदान में? क्या AAP के पास पंजाब में कोई भरोसेमंद चेहरा नहीं?
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