नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में किसकी चलेगी केजरीवाल की या फिर उपराज्यपाल की. इसको लेकर केजरीवाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. केजरीवाल सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट तय कर दे दिल्ली का बॉस कौन है. केजरीवाल या फिर केंद्र सरकार के प्रतिनिधि उपराज्यपाल. सवाल इससे भी बड़ा है कि हर छोटी-बड़ी बात पर क्यों लड़ते हैं केजरीवाल ?
 
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दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 67 सीटें जीत कर सत्ता में जब से केजरीवाल आए हैं तब से उनकी और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच नहीं पट रही है. केजरीवाल कहते हैं कि दिल्ली के बॉस वो हैं और उपराज्यपाल कहते हैं सुप्रीम बॉस तो मैं हूं.
समय-समय पर दोनों के बीच टकराहट दिखती भी रही है.
 
दिल्ली सरकार ने एंटी करप्शन यूनिट बना दी लेकिन उपराज्यपाल ने केजरीवाल के इस एंटी करप्शन यूनिट को ही ये कहकर नकेल पहना दी कि दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन यूनिट को केंद्र से आए अधिकारियों पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है.
 
केजरीवाल सरकार कहती है कि केंद्र के अधिकारी उनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं जबकि केंद्र सरकार कहती है कि जो केंद्र के अधिकारी दिल्ली में काम करने आते हैं वो यूनियन टेरिटोरी के अधिकारी होती है जिन पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से केंद्र का अधिकार होता है.
 
इसलिए केंद्र से आए अधिकारी दिल्ली में किस पद पर काम करेंगे ये तय करने का अधिकार भी केंद्र को ही है. जबकि केजरीवाल चाहते हैं कि जिस तरह से राज्यों में केंद्र के अधिकारी उस राज्य का कैडर बनकर जाते हैं तो राज्य के कैबिनेट के आदेश का पालन करना उनका कर्तव्य होता है. राज्यपाल कैबिनेट के आदेश को मानने के लिए बाध्य है. 
 
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अब केजरीवाल कितना सही हैं और केंद्र का कहना कहां तक उचित है. फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है. इसलिए इंडिया न्यूज के खास शो ‘जन-गण-मन’ में आज बहस का मुद्दा यही है कि केजरीवाल हर छोटी-मोटी बात पर इतना लड़ते क्यों हैं ? क्या केजरीवाल जो कहते हैं वो सही है या फिर उपराज्यपाल जो कहते हैं वो सही है?
 
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