नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में चुनावी महाभारत से पहले सांप्रदायिकता की सियासत एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है. इस बार मसला उठाया गया है शामली के कैराना से हिंदुओं के पलायन का. इलाहाबाद में चल रही बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मसले पर चिंता जताते हुए कहा कि कैराना की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है.
 
उधर समाजवादी पार्टी इस पूरे मामले के लिये बीजेपी को ही कठघरे में खड़ा कर रही है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यूपी के कैराना में कश्मीर जैसे हालात बन रहे हैं? क्या कैराना में सांप्रदायिकता का ज़हर घोला जा रहा है ? 
 
ये सवाल इसलिए क्योंकि कैराना में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था की वजह से सैकड़ों हिंदू परिवार अपना घरबार छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं..। अपहरण, रंगदारी, चोरी-डकैती, बलात्कार और कत्ल जैसी वारदात ने लोगों की जीना मुहाल कर दिया है.
 
इंडिया न्यूज के खास शो ‘जन गण मन’ में आज इन्हीं सवालों को जानने की कोशिश की गई. क्या कैराना यूपी में 2017 का चुनावी मुद्दा बनेगा और क्या सियासी पार्टियां कैराना के बहाने ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही हैं?
 
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