नई दिल्ली. सेक्युलरिज्म शब्द को लेकर इन दिनों तेज बहस हो रही है. देश की संसद में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ये कहा कि इस शब्द का इस्तेमाल सियासी फायदे-नुकसान के लिए होता रहा है. राजनाथ के मुताबिक अगर बाबा साहब अंबेडकर को ये लगता कि सेक्युलरिज्म और सोशलिस्ट शब्द को शामिल करना है तो उसी वक्त उसे संविधान की प्रस्तावना में शामिल कर लेते.
 
लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं किया बाद में कांग्रेस की सरकार के समय 42 वें संशोधन में इसे जोड़ा गया. राजनाथ के बयान के दौरान ही संसद में तीखी बहस जैसा माहौल बन गया. लेकिन सवाल ये है कि क्या सचमुच इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल सियासी फायदे के लिए हुआ?
 
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