नई दिल्ली. इंडिया न्यूज़ के विशेष शो गुडलक गुरु में आज पवन सिन्हा ने फूलों से होने वाले फायदों के बारे में बताया. गुरूजी ने बताया कि इन फूलों के इस्तेमाल से कैसे बीमारियों से बचा रहा जा सकता है. 

कमल- वैसे तो कमल का फूल कई रंगों में होता है, लेकिन ज्यादातर लाल और सफेद ही होता है. इसकी पंखुड़ियों को पीसकर चेहरे पर मलने से सुंदरता बढ़ती है, इनके फूलों के पराग से मधुमक्खियां शहद बनाती हैं.

गुलाब- गुलाब बहुत ही गुणकारी फूल है, लेकिन केवल देशी गुलाब, जो सिर्फ गुलाबी और लाल रंग का होता है और जो बहुत खुशबूदार होता है. इन फूलों का गुलकंद गर्मी की कई बीमारियों को शांत करता है. गुलाबजल से आंखों को धोने से आंखों की जलन में आराम मिलता है. गुलाब का इत्र मन को प्रसन्नता देता है. गुलाब का तेल मस्तिष्क को ठंडा रखता है और गुलाबजल का प्रयोग उबटनों और फेसपेक में किया जा सकता है.

चमेली- खुशबू से भरे ये फूल बेहद नाजुक होते हैं. चमेली के फूलों से बना तेल चर्म रोग, दंत रोग, घाव आदि पर गुणकारी है. चमेली के पत्ते चबाने से मुंह के छालों में तुरंत राहत मिलती है.

चंपा- यह तीन रंगों सफेद, लाल और पीले रंगों में पाया जाता है. पीले रंग की चंपा को स्वर्ण चंपा कहा जाता है और ये बहुत ही कम नजर आता है. चंपा के फूलों को सुखाकर चूर्ण बनाएं और तेल में मिलाकर खुजली वाले हिस्से पर लगाएं, तुरंत राहत मिलती है. स्वर्ण चंपा कुष्ठ रोग में भी कारगर सिद्ध होता है.

नीमफूल- नीम के फूलों की लुगदी बनाकर किसी भी प्रकार के त्वचा रोग पर लगाने से रोग दूर होता है, नीम का पेड़ कल्पवृक्ष के नाम से जाना जाता है, इसकी कोमल डंडियों से दातुन किया जाता है, नीम की पत्तियों को पीसकर रस निकालकर पीने से कई बीमारियां दूर होती हैं, इसके लेप से मुहाँसे और अन्य चर्म रोगों में लाभ होता है.

मोगरा- यह फूल भी खुशबूदार होता है. यह गर्मी में खिलता है. इन फूलों को अपने पास रखने से पसीने की दुर्गंध नहीं आती है. इसकी कलियाँ चबाने से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाली परेशानी कम होती है.

गेंदा- चर्म रोग होने या शरीर के किसी हिस्से में सूजन आ जाने पर इन फूलों को पीसकर पेस्ट बनाकर लगाने से फायदा होता है, साथ ही अगर मच्छरों का प्रकोप कम या दूर करना हो तो घर के आसपास गेंदे की झाड़ी लगाएं. इसकी गंध से मच्छर दूर भागते हैं.

पारिजात- पारिजात के फूल बहुत नजाकत भरे होते हैं. इन फूलों की छोटी-छोटी डंडियां केसरिया होती हैं. इन डंडियों को शरीर पर मलने से गठिया में लाभ होता है. इन फूलों का काढ़ा कई रोगों में लाभ पहुंचाता है.