नई दिल्ली. गेंहू जहां जीवन रक्षक है, वहीं सीधे सूर्य से सम्बंधित भी है इसलिए यदि आप सूर्य से सम्बन्धित किसी भी समस्या से ग्रस्त हैं तो गेंहू आपके लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा. इसके अतिरिक्त गेंहू के जवारे एक अमूल्य औषधि हैं.
 
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गेहूं के जवारे को जिसे हम आपतौर पर वीट ग्रास भी बोलते हैं वह बहुत स्वास्थ्यवर्धक व चिकित्सकीय गुणों वाले होते हैं. प्राचीन काल से ही हिन्दुस्तान के चिकित्सक गेहूँ के ज्वारों को विभिन्न रोगों जैसे अस्थि-संध शोथ, कैंसर, त्वचा रोग, मोटापा, डायबिटीज आदि के उपचार में प्रयोग कर रहे हैं.
 
जब गेहूं के बीज को अच्छी उपजाऊ जमीन में बोया जाता है तो कुछ ही दिनों में वह अंकुरित होकर बढ़ने लगता है और उसमें पत्तियां निकलने लगती है. जब यह अंकुरण पांच-छह पत्तों का हो जाता है तो अंकुरित बीज का यह भाग गेहूं का ज्वारा कहलाता है. इसके अंदर 19 अमीनो एसिड और 92 खनिज हैं, जो शरीर को अपने उच्चतम स्तर पर कार्य करने की ताकत प्रदान करने में सक्षम हैं.
 
गेहूं के जवारों में अनेक अनमोल पोषक तत्व व रोग निवारक गुण पाए जाते हैं, जिससे इसे आहार नहीं वरन् अमृत कहा गया है गेहूँ के ज्वारे से मानव को संपूर्ण पोषण मिल जाता है. 100 ग्राम ताजा रस में 90-100 मिली ग्राम क्लोरोफिल प्राप्त हो जाता है.
 
इसमें पाया जाने वाला क्लोरोफिल हमें तीन प्रकार से लाभ देता है-
1-शोधन – घावों के लिए क्लोरोफिल अत्यंत प्रबल कीटाणुनाशक है. यह फंगसरोधी भी है और शरीर से टॉक्सिन्स को निकालता है तथा यकृत का शोधन करता है.
 
2- एंटी-इन्फ्लेमेट्री – यह शरीर में इन्फ्लेमेशन को कम करता हैं. अतः आर्थ्राइटिस, आमाशय शोथ, आंत्र शोथ, गले की ख़राश आदि में अत्यंत लाभदायक हैं.
 
3- पोषण – यह रक्त बनाता है, आंतों के लाभप्रद कीटाणुओं को भी पोषण देते हैं.