नई दिल्ली.  हिंदू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है. विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है – विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना. पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है.
 
अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे कि किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता. अग्नि के सात फेरे ले कर और ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं.
 
हिंदू धर्म में शादी को पवित्र क्यों माना जाता है बताएंगे अध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा इंडिया न्यूज शो गुडलक गुरु में.
 
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