नई दिल्ली. देश में स्मार्ट शहरों को बसाने की कवायद तेज़ हो गई है. बड़े शहरों पर आबादी का बोझ कम करने के लिए पुराने और नए शहरों को स्मार्ट सिटी में तब्दील किया जाएगा. स्मार्ट सिटी में निवेश कैसा रहेगा अब इस पर भी नज़र डाल देते हैं. देश के 13 नए शहरों को फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने का ऐलान कर दिया गया है. ऐसे में दिल्ली-एनसीआर और अन्य मेट्रो सिटीज में प्रॉपर्टी में निवेश की की जगह छोटे शहरों में निवेश ज्यादा मुनाफा देंगे.
 
जानकारों की राय में मेट्रो सीटीज़ के मुकाबले टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रॉपर्टी की मांग सबसे अधिक होगी. इन शहरों में मकान की कीमते भी कम और मध्यम वर्ग की पहुंच में रहेगी लिहाजा यहां निवेश पर निवेशकों को जोरदार रिटर्न मिलेगा. दरअससल स्मार्ट सीटीज़ के बनने से उनका इंस्टीट्यूशनल इंफ्रास्ट्रक्चर, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत है और कयास लगाए जा रहे है कि इन नए 13 शहरों में प्रॉपर्टी में निवेश पर अगले चार से पांच साल में 100-150 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है.
 
यह घोषणा शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने मंगलवार को की. इन 13 शहरों को फास्ट ट्रैक कंपीटीशन के आधार पर चुना गया है. इसमें बिहार, यूपी और झारखंड के एक-एक शहर को मौका मिला है. जहां लिस्ट में लखनऊ सबसे टॉप पर है. वहीं फरीदाबाद को सबसे अंतिम में स्थान मिला है.
 
23 शहरों ने फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी की दावेदारी पेश की थी जिसमें अभी 13 शहर ही क्वालिफाई कर पाए हैं. नायडू ने ट्विटर कर इन शहरों की लिस्ट जारी की है. 
 
स्मार्ट सिटी पर खर्च
स्मार्ट सिटी के लिए चुने गए हर शहर को पहले साल 200 और उसके बाद चार साल के लिए हर साल 100 करोड़ रुपये मिलेंगे. केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट पर अगले पांच साल में 48 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी और इतनी ही रकम राज्य मिलकर खर्च करेंगे.
 
अब तक 33 शहरों का नाम शामिल
इसके पहले जनवरी में शहरी विकास मंत्रालय ने 20 शहरों को स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल किया था. आज के ऐलान के बाद अब देश में 33 शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चुन लिया गया है.
 
इस साल 27 और शहरों को मिलेगा मौका
इस साल 27 और शहरों को स्मार्ट सिटी में शामिल किया जाएगा. पटना, शिमला, न्यू रायपुर, अमरावती, बंगलुरु, तिरुवनंतपुरम, रायबरेली और मेरठ को भी प्रतियोगिता में शामिल करने का मौका दिया गया है.
 
2022 तक सबको आवास मुहैया कराना सरकार का प्रमुख एजेंडा है. ऐसे में नए शहरों के विकसत होते ही घरों की मांग को भी पूरा किया जा सकेगा. देश के सभी प्रमुख राज्यों में 4-6 स्मार्ट सिटी बनाई जाएगी. इसके चलते सभी राज्य सरकारों ने अपने प्रमुख शहरों के लिए नए मास्टर प्लान बना दिए गए हैं.
 
छोटे शहरों में ज्यादातर डेवलपर्स का मानना है कि सस्ते घरों की डिमांड में तेजी की उम्मीद पर ज्यादातर निवेशक इन शहरों में निवेश कर ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पा सकते हैं. हालांकि जानकारों का मानना है कि छोटे शहरों की प्रॉपर्टी में लम्बी अवधि में निवेश करना ज्यादा कारगर रहेगा.