नई दिल्ली. सैकड़ो फ्लैट बन रहे हैं और बिल्डिंग पर बिल्डिंग खड़ी हो रही हैं लेकिन इन इमारतों के इर्द गिर्द कही कोई हरियाली नहीं है. अभी आबादी नहीं है. सवाल यह उठ रहा है कि जिस दिन यहां लोग रहने लगेगे तो फिर इन क्रकीट के जंगलो में सांसे कैसे लेगें ?
 
भले ही विकास के नाम पर बिल्डिंग बन रही है लेकिन निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल पर पूरे इलाके प्रदूषित कर रही है. चिंता की बात है कि जो लोग यहां रह रहे हैं या जो भविष्य में रहने आएंगे क्या वह इस माहौल को झेल पाएंगे?
 
यही चिंता एनजीटी यानि नेशनल ग्रिन ट्रीब्यूनल भी महसूस कर रहा है और इसी वजह से एनजीटी ने सख्त आदेश दिए हैं. एनजीटी के मुताबिक Moef साल 2010 की गाइडलाइन्स का पालन नहीं करने वाले बिल्डर्स के काम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाया जाएगा.
 
NGT ने प्राधिकरण को भी आदेश देते हुए सुनिश्चित करने को कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली साइट पर तुरंत प्रभाव से काम को रोका जाए और ऐसे बिल्डर्स पर जुर्माना लगाया जाए. इसी के मद्देनजर नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डर्स पर जुर्माना ठोकना शुरू कर दिया है.
 
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर प्रदूषण और मज़दूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के पर्याप्त इंतजाम न होने और NGT की सख्ती के बाद भी बिल्डर्स ने प्रदूषण कम करने के इंतजाम नहीं किया. जबकि हालही में नोएडा अथॉरिटी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की अनदेखी करने वाले बिल्डर्स पर 50,000 रूपये जुर्माना लगाया है. इतना ही नहीं कॉन्टेक्ट्रर्स पर उससे दोगुना यानि 1 लाख रूपये तक का जुर्माना लगाया है.