नई दिल्ली. बिल्डर्स की मनमानी से परेशान ग्राहकों के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटर का इंतजार खत्म हो चुका है. कैबिनेट से रियल एस्टेट बिल को मंज़ूरी मिल गई है. इस बिल के संसद में पास होते ही बिल्डरों से परेशान ग्राहकों की तमाम तरह की मुश्किलें हल हो जाएगी. सबसे बड़ा फायदा तो ये होगा कि ग्राहकों के पैसे नहीं फंसेंगे क्योंकि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिले बिना कोई भी बिल्डर काम शुरू नहीं कर पाएंगे और प्री लॉन्च और लंबे चौड़े वायदे वाले विज्ञापनों पर भी रोक लगना तय है. 
 
खास रिपोर्ट
देश की राजधानी दिल्ली में आशियाने का सपना सच करने वाली डीडीए की हाउंसिंग स्कीम का काला सच सामने आया है. ये पहला मौका है कि लंबी लाइनों में लगकर भारी संख्या में डीडीए की हाउसिंग स्कीम में हिस्सा लेने वाले हजारों लोगों ने लकी ड्रा में निकले फ्लैट की चाभी डीडीए को लौटा दी है जिन घरों के ड्रा में निकलने के लिए लोग पूजा अर्चना करते है आखिर उनको लौटाने की नौबत क्यों आई यही सबसे बड़ा सवाल है.
 
दिल्ली के द्वारका में 26 सोसायटी के मकान मालिकों और DDA के बीच विवाद छिड़ गया है. दरअसल साल 2003 से द्वारका सोसायटी में रहने वाले लोग अपनी सोसायटी को रेग्यूलर करने की मांग कर रहे हैं. साल 2011 में यहां लोगों ने सेल्फ ड्रॉ के ज़रिए घरों का एलॉटमेंट कर तो लिया लेकिन डीडीए और रिजिस्ट्रा कॉपोरेटिव सोसायटी ने इसे गैरकानूनी बता दिया लेकिन 26 सोसाइटी के मकाम मालिक अदालत से केस जीत गए लेकिन डीडीए ने अभी भी इन मकान मालिकों को उलझाए रखा है.