नई दिल्ली: भारत की प्राचीनतम विधाओं में से एक सामुद्रिक शास्त्र एक गहरा ज्ञान है, जो हर बार हमें एक नया विषय प्रदान करता है. सामुद्रिक शास्त्र की सहायता से व्यक्ति के चेहरे-मोहरे, शरीर के विभिन्न अंगों और यहां तक की उसकी चाल एवं बोलने के ढंग से भी उसके चरित्र का अंदाज़ा लगाया जाता है.
 
 
आप यकीन नहीं करेंगे कि सामुद्रिक शास्त्र के यह अनुमान सटीक परिणामों से कुछ कम नहीं हैं. खैर अब तक हमारे द्वारा सामुद्रिक शास्त्र की मदद से व्यक्ति के विभिन्न अंगों के जरिए उसके चरित्र की व्याख्या की गई है. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए हम एक और शारीरिक अंग के बारे में बात करेंगे.
 
 
आज यहां हम सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार हमारी गर्दन हमारे स्वभाव के बारे में क्या कहती है, यह बताएंगे. बीते समय में हमारे द्वारा आंखों, हाथ, पांव, हाथ-पांव की अंगुलियों, दांतों, नाभि, सिर, नाक, कान, इत्यादि अंगों का हमारे स्वभाव में क्या योगदान है यह बताया गया. इस सामुद्रिक शास्त्र के माध्यम से बताएंगी   आपकी गर्दन और स्वभाव के राज सिर्फ पर