नई दिल्ली. हम आजाद देश के नागरिक हैं और अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन थोड़ा ठहरकर सोंचे, अपने आस-पड़ोस, समाज और देश के प्रति क्या हमें हमारे कर्तव्यों का एहसास है.
 
साफ-सुंदर, विकसित और खुशहाल भारत..यही है सबका सपना. आजादी के इतने सालों में विकास की गति तेज हुई है. इसके बावजूद बहुत से लोग मानते हैं कि हममें सिविक सेंस की कमी है. कई सर्वे भी इस बात को साबित करते हैं.
 
महान दार्शनिक अरस्तू के अनुसार, अच्छा इंसान होने और अच्छा नागरिक बनने में अंतर है. हम अच्छे इंसान होने का दावा तो करते है लेकिन अपने आस-पड़ोस को गंदा करने में बिल्कुल पिछे नहीं रहते. इससे होने वाले नुकसान को बताएंगी जय मदान इंडिया न्यूज खास शो फैमिली गुरु
 
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