नई दिल्ली. बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री और सेंसर बोर्ड की पूर्व अध्यक्षा शर्मिला टैगोर साहित्य अकादमी लौटाने वाले लेखकों के पक्ष में उतर गई है. उन्होंने सीआईआई बिग फिक्चर समिट में कहा कि लेखकों और साहित्यकारों की तरफ से साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाना एक सहज कदम है. दादरी कांड के बाद पूरे देश में फैला सांप्रदायिक तनाव, बाबरी विध्वंस और इमरजेंसी की याद दिलाता है.

नेशनल अवार्ड से सम्मानित शर्मिला टैगोर ने कहा, ‘ये वक्त भारत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. देश में फैली हिंसा और सांप्रदायिकता को कोई बर्दाशत नहीं कर सकता. इन घटनाओं में लोगों को शारीरिक कष्ट दिया जा रहा है. जिसके खिलाफ लोग आवाज उठा रहे हैं और इसका विरोध कर रहे हैं. यह एक सकरात्मक प्रतिक्रिया है.’

दादरी में पीड़ित परिवार को मिले न्याय

शर्मिला ठैगोर ने दादरी कांड के पीड़ित परिवार के लिए भी न्याय की मांग की है. उन्होंने कहा, दादरी में जो हुआ वह हिंसा की सारी हदें पार कर चुका है. इस मामले में अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है. अगर हम विरोध नहीं करेंगे तो इन घटनाओं को रोका नहीं जाएगा और ये घटनाएं बढ़ेंगी जिससे समाज में गलत संदेश जाएगा.