नई दिल्ली: सदि के महानायक अमिताभ बच्चन ने अबतक लगभग सभी दिग्गज फिल्म निर्देशकों के साथ काम कर लिया है. बॉलीवुड में कई दशक बिता चुके अमिताभ बच्चन की मेहनत का लोहा हर कोई मानता है. आज के दौर के अभिनेताओं को तो निर्देशक शूटिंग के दौरान डांट भी देते हैं लेकिन अमिताभ बच्चन की हर कोई इज्जत करता है और अगर वो कोई सुझाव भी देते हैं तो उसपर गौर किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमिताभ बच्चन किस डायरेक्टर से सबसे ज्यादा खौफ खाते थे? जी हां, एक डायरेक्टर ऐसे भी थे जिनसे अमिताभ बच्चन को डर लगता था. अमिताभ बच्चन के 75वें जन्मदिन पर उनकी 75 कहानियों की इस आखिरी कड़ी में जानिए बिग बी की जिंदगी की अनसुनी कहानियां.
 
किस डायरेक्टर से खौफ खाते थे बच्चन
 
जब केबीसी के सैट पर अमिताभ बच्चन ने धर्मेन्द्र को बुलाया तो धर्मेन्द्र अमिताभ से सवाल पूछने लगे और उनमें से एक सवाल था कि वो कौन सा डायरेक्टर था, जिसमें हम दोनों ही खौफ खाते थे. दोनों का जवाब एक ही था, हृषिकेश मुखर्जी. मुखर्जी को अमिताभ और जया दोनों अपना गॉड फादर मानते थे. दोनों के कैरियर की बेहतरीन फिल्में मुखर्जी ने बनाईं. अमिताभ की ऐसी फिल्में जिनमें वो सुपरहीरो नहीं दिखते, एक आम आदमी दिखते हैं, फिर भी बेहतरील लगते हैं, ऐसी फिल्में मुखर्जी ने बनाईं. जिनमें चुपके चुपके, आनंद, अभिमान, गुड्डी और मिली आदि शामिल हैं. लेकिन उनका खौफ इस कदर बॉलीवुड के सितारों में था कि जो शत्रुघ्न सिन्हा हर फिल्म के सैट पर लेट आते थे, अपनी बायोग्राफी में बताते हैं कि मेरी हृषिकेश मुखर्जी के सैट पर कभी लेट आने की हिम्मत नहीं हुई. अमिताभ ने जब आनंद के क्लाइमेक्स सीन में जब रोने धोने की बहुत प्रेक्टिस कर ली और मुखर्जी को बताया था वो बोले कि तुम्हें रोना नहीं बल्कि लआनंद पर गु्स्सा होना है, लेकिन लाउड नहीं होना है, वरना आनंद का किरदार दब जाएगा. अमिताभ को वही करना पड़ा. ऐसे ही थे हृषिकेश मुखर्जी.
 
जितेन्द्र की छोडी फिल्में करने को मजबूर थे तब बच्चन
 
हमेशा ऐसा नहीं होता कि कोई एक हीरो फिल्म छोड़े और दूसरा हीरो इसे लपके और फिल्म सुपरहिट हो जाए. अमिताभ बच्चन के साथ भी ऐसा ही हुआ, जब जीतेन्द्र की छोड़ी फिल्म हाथ लगने पर भी अमिताभ बच्चन की वो फिल्म बुरी तरह पिट गई. दरअसल जीतेन्द्र ने भी वो फिल्म मजबूरी मे छोड़ी थी. मामला ये था कि उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में एक रूल बन गया था कि कोई भी हीरो 6 से ज्यादा फिल्मों में एक बार में काम नहीं करेगा. निर्माता डेट्स ना मिलने से परेशान थे और नए हीरोज फिल्में ना मिलने से. ऐसे में हर किसी ने ना चाहते हुए भी इसे फॉलो करना शुरू कर दिया. चूंकि जितेन्द्र की 6 फिल्में फ्लोर पर थीं तो वो रोल अमिताभ बच्चन के पास चला गया. इस फिल्म का नाम था ‘प्यार की कहानी’ और इसमें उनके साथ थे तनूजा, अनिल धवन और फरीदा जलाल. ये एक तमिल फिल्म का रीमेक थी. अमिताभ का रोल इस फिल्म में एक चपरासी का था, मजबूरी में अमिताभ ने ये फिल्म तो कर ली, लेकिन उनका ये फैसला निराशाजनक साबित हुआ. ये फिल्म एक बड़ी फ्लॉप फिल्म साबित हुई.
 
याराना की शूटिंग ब्रेकफास्ट टाइम में
 
याराना के डायरेक्टर राकेश कुमार हर हाल में अमिताभ बच्चन को ही अपनी फिल्म में लेना चाहते थे. लेकिन जब भी वो बच्चन के पास जाते वो अपनी डायरी उन्हें दिखा देते कि देखो कोई भी डेट खाली नहीं है. एक बार राकेश कुमार ने उनके हाथ से वो डायरी ले ही ली, वाकई में अमिताभ के पास कोई डेट नहीं थी. एक ही दिन में वो तीन तीन फिल्मों की शूटिंग में मशरूफ थे. तब राकेश कुमार ने उन्हें बताया कि डायरी के मुताबिक आप सुबह 7 बजे से 8 बजे तक खाली हैं. तब अमिताभ ने मुस्कराकर कहा कि अगर आप इतनी सुबह शूट कर सकते हैं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है. तब जिस स्टूडियो में अमिताभ को 8 बजे जाना था, उसी स्टूडियो में याराना का सैटअप लगवाया और ऐसे महीनों याराना की शूटिंग सुबह 7 से 8 बजे ही हुई। बाद में कुछ शूट आउटडोर किए गए.
 
याराना की जैकेट के स्विच की कहानी
 
अमिताभ बच्चन अपनी हर फिल्म में कोई ना कोई ऐसा प्रतीक इस्तेमाल करना चाहते थे जिसको कि पब्लिक भी फॉलो करे, वो स्टाइल आइकॉन बन जाए. कुली का बिल्ला नंबर 386, कुली-हम और बंटी-बबली का गमछा, अमर अकबर एंथनी का क्रॉस वाला पेंडेंट, चुपके चुपके का चश्मा, शोले का सिक्का, त्रिशूल का वूलन नैक बैंड आदि. तो याराना के लिए भी उन्होंने ऐसा ही एक प्रतीक सुझाया. एक गाने में अमिताभ को रॉक स्टार की तरह गाना गाना था, डांस परफॉर्मेंस देनी थी. ए सारा जमाना हसीनों का दीवाना. इस गाने के लिए बच्चन ने एक ऐसी जैकेट का आइडिया दिया, जो जलती बुझती रहे. लेकिन तब कोई ऐसी टेकनीक नहीं थी, जो जैकेट में लाइट्स को जला बुझा सके. तो अमिताभ की मदद के लिए उस जैकेट में उनके हाथ के पास एक स्विच लगाया गया। जो अमिताभ ही डांस करने के साथ ही ऑन ऑफ करते रहे.
 

 

 
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