नई दिल्ली: अमिताभ बच्चन अपना 75वां जन्मदिन मना चुके हैं. दुनियाभर से उनके फैंस ने उन्हें उनके 75वें जन्मदिन पर बधाई दी और उनकी लंबी उम्र की कामना की. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमिताभ किन खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे हैं? जी हां, अमिताभ बच्चन सिर्फ 25 फीसदी लीवर काम कर रहा है. दरअसल कुली की शूटिंग के दौरान जब अमिताभ बच्चन बुरी तरह घायल हुए थे, तब उन्हें 60 बोतल खून चढ़ाया गया था और उसी दौरान किसी ऐसे शख्स का खून उन्हें चढ़ गया जिसे हैपेटाइटिस-बी की बीमारी थी. खून के जरिए ये बीमारी अमिताभ बच्चन को भी लग गई. अमिताभ की जिंदगी से जुड़ी अनसुनी कहानियों की इस कड़ी में पढ़िए ऐसी ही पांच कहानियां.  
 
25 फीसदी लीवर पर जिंदा है अमिताभ बच्चन
 
अमिताभ बच्चन के लिए कुली के एक्सीडेंट के बाद पूरे देश ने दुआएं की थीं. ये सबको पता है, लेकिन अमिताभ कितनी बड़ी बड़ी बीमारियों से घिरे रह चुके हैं, ये बहुतों को पता ही नहीं. जिनको पता भी है तो इसलिए क्योंकि बच्चन ने किसी वजह से खुद बताया. जब बच्चन को गम्भीर बीमारी टीबी रोकथाम कार्य़क्रम का ब्रांड अम्बेसडर बनाया तब उन्होंने ये खुलासा कि एक दौर में उन्हें टीबी थी, बड़ी मुश्किल से वो उससे उबर पाए. इसी तरह हेपेटाइटिस बी वाइरस के लिए सरकारी कार्य़क्रम का मीडिया कैम्पेन लांच करते वक्त अमिताभ ने एक और बड़ा खुलासा लोगों से किया, वो ये कि अमिताभ बच्चन का 75 फीसदी लीवर नष्ट हो चुका है और वो केवल 25 फीसदी पर ही जी रहे हैं. और ये सब हुआ हेपेटाइटस बी वाइरस की चपेट में आकर. दरअसल हुआ यूं कि बच्चन को कुली एक्सीडेंट के बाद 200 ब्लड डोनर्स से 60 बोतल ब्लड चढाया गया था. जिनमें से एक का ब्लड हेपेटाइटस बी संक्रमित था. जो उनको 2000 मे जाकर पता लगा, डॉक्टर्स ने उस बीमारी की भयावह तस्वीर पेश की. हालांकि बच्चन अब काफी संभल गए हैं, लेकिन लीवर 25 फीसदी से ही काम चला रहे हैं. डॉक्टर्स ने उन्हें बताया कि केवल 12 परसेंट लीवर बचा हुआ तो भी आदमी जिंदा रह सकता है.  
 
जब गगरी फोडने के चक्कर में फूट गया अमिताभ का सर
 
ये वाकया फिल्म खुद्दार के सैट का है. खुद्दार वो फिल्म है, जिसे अमिताभ ने अपने पुराने दोस्त अनवर अली को फाइनेंशियल क्राइसिस से निकालने के लिए साइन किया था. हालांकि इस शर्त के साथ इसको कादरखान लिखेंगे और परवीन बॉबी हीरोइन होंगी. जब इस फिल्म के लिए एक गाना फिल्माया जा रहा था, मच गया शोर सारी नगरी है, आया ब्रज का बांका संभाल तेरी गगरी रे. लेकिन बच्चन खुद को ही नहीं संभाल पाए. सर से गगरी फोड़ने के चक्कर में बच्चन को इतनी चोट लगी कि माथे और सर से खून निकल आया. उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा था.
 
एक भिखारी के चलते अमिताभ को क्यों मांगनी पड़ी गोवा वालों से माफी
 
यूं तो अमिताभ बच्चन ने अपनी तमाम फिल्मों की शूटिंग गोवा में की, और कई फिल्में में तो किरदार भी गोवा से जुड़े थे, लेकिन फिर भी गोवा वाले अमिताभ बच्चन से एक बार इस कदर नाराज हुए कि अमिताभ को सॉरी बोलना पड़ा तब उनकी नाराजगी दूर हुई. दरअसल हुआ यूं कि अमिताभ-धर्मेन्द्र की फिल्म राम बलराम में अमिताभ का एक सीन था, जिसमें वो जैसे ही गोवा पहुंचते थे, एक भिखारी उनके पास आकर कोंकणी भाषा में उनसे कहता है, ‘’आऊ गारिब गोयनकर, माका जेऊ दी”. जिसका मतलब हिंदी में होता है, मैं एक गरीब गोवावासी हूं, मुझे कुछ खाने को दे दो. ऐसे तो उस सीन में कोई खास बात नहीं थी, ना जाने कितनी फिल्मों में भिखारी दिखाए जाते रहे हैं. मधुऱ भंडारकर ने तो भिखारियों पर पूरी फिल्म ट्रैफिक सिग्नल ही बना डाली थी, लेकिन इस सीन को देखकर गोवा की तमाम जानीमानी हस्तियां नाराज हो गईं और अमिताभ बच्चन से सॉरी बोलने की मांग करने लगीं. उनका कहना था कि गोवा में भिखारी दिखाना देश दुनियां में गोवा की इमेज खराब करना है. जब बात ज्यादा बढ़ी तो अमिताभ बच्चन ने खेद जताकर गोवा वालों का गुस्सा कम किया था.
 
कुली एक्सीडेंट के बाद फिल्म में हुए ये दो बड़े बदलाव
 
फिल्म कुली अमिताभ के एक्सीडेंट के बाद देश भर में चर्चा का विषय बन गई थी. लोगों की दुआओं से अमिताभ बच गए और फिर से उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी. लेकिन मनमोहन देसाई ने इस एक्सीडेंट के बाद फिल्म में दो बड़े बदलाव कर दिए. दीवार और शोले की तरह इस फिल्म के एंड में भी अमिताभ को गोली लगकर मरते हुए दिखाया जाना था, लेकिन अमिताभ की मौत की आशंका से जिस कदर उनके फैंस दुखी हुए थे, उसको देखकर देसाई को लगा कि अब अगर वो सीन रख दिया तो शायद लोगों को पसंद ना आए. इसलिए फिल्म का क्लाइमेक्स बदल दिया गया, फिल्म की हैप्पी एंडिंग कर दी गई. दूसरा बदलाव ये किया गया कि जिस सीन में उनको चोट लगी थी, उस सीन को फिल्म में फ्रीज करके लिख दिया गया कि इसी सीन को शूट करते वक्त अमिताभ बच्चन को चोट लगी थी. देसाई का ये बदलाव रंग लाया और कुली रिलीज के बाद सुपरहिट हो गई. हालांकि एक और बड़ा फैसला मनमोहन देसाई ने इस फिल्म के बाद लिया था अपनी अगली फिल्म मर्द से पुनीत इस्सर को बाहर कर दिया. पुनीत के घूंसे से ही अमिताभ बच्चन को वो चोट लगी थी.
 
शोले में हो चली थी जब अमिताभ को जिंदा करने की तैयारी
 
शोले को जितनी शिद्दत से बनाया गया था, उतना ही एक्साइटमेंट उसकी टीम में था। 15 अगस्त 1975 को शुक्रवार के ही दिन ये फिल्म रिलीज हुई थी. पहले दिन सन्नाटा था. शनिवार को रमेश सिप्पी एक हॉल से दूसरे हॉल में जाकर देख रहे थे. लेकिन फिल्म के लिए कोई एक्साइटमेंट लोगों में नहीं दिख रहा था. तीसरा दिन आते आते तो फिल्मी पंडितों ने फिल्म को डिजाइस्टर धोषित कर दिया. फौरन सबने अमिताभ बच्चन के घर मीटिंग बुलाई. उन्होंने नतीजा निकाला कि अमिताभ को मारने का आइडिया ठीक नहीं था, लोगों को शायद पसंद नहीं आया है. फौरन अमिताभ को जिंदा दिखाने का शूट करने की प्लानिंग की गई. रामगढ़ के लिए शूटिंग उपकरण भेजने को भी कह दिया गया, वो पहुंच भी गए. लेकिन सिप्पी ने कहा कि हमें एक वीकेंड और देखना चाहिए. उन दिनों एक दो हफ्ते अगर फिल्म नहीं चलती थी तो भी उसमें कुछ गाना या सीन जोड़कर डायरेक्टर नए सिरे से फिल्म रिलीज कर देते थे. अगले वीकेंड तक तो फिल्म की इतनी माउथ पब्लिसिटी हो चुकी थी कि हॉल्स में पैर रखने तक को जगह नहीं थी, सो अमिताभ को जिंदा करने के फैसले पर रोक लगा दी गई. 
 
 

पढ़ें-