नई दिल्ली: ये फिल्मों की दुनिया है. यहां छोटी से छोटी घटना या आम बोल-चाल में इस्तेमाल होने वाले शब्द भी डायलॉग बन जाते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ था फिल्म पुकार के दौरान. फिल्म पुकार का गाना समंदर में नहाके और भी नमकीन हो गई हो… तो आपको याद ही होगा. अमिताभ बच्चन और जीनत अमान के ऊपर फिल्माए गए सुपरहिट गाने का आईडिया आरडी बर्मन को तब आया जब जीनत अमान बारिश की वजह से कीचड़ में फिसलर गिर गईं और पूरी तरह भीग गईं. अमिताभ बच्चन की बर्थडे सीरीज की इस कड़ी में पढ़िए ऐसी ही पांच दिलचस्प और अनसुनी कहानी. 
 
जब जीनत फिसलीं तो बन गया बिग-बी का सुपरहिट गाना 
 
 
समंदर में नहाके…  पुकार फिल्म का ये गाना अमिताभ और जीनत अमान पर फिल्माया गया था. इस गाने को लिखने की कहानी भी काफी दिलचस्प है. इस गाने को लिखा था गुलशन बावरा ने और म्यूजिक दिया था आरडी वर्मन ने. एक बार दोनों लोग खंडाला की एक पार्टी में थे, ये पुकार फिल्म की शूटिंग के दौरान ही था. ऐसे में जीनत अमान को भी वहां आना था, उसी दिन बारिश भी हो गई तो फॉर्म हाउस पर मिट्टी गीली हो गई थी. जैसे ही जीनत गाड़ी से उतरकर फॉर्म हाउस की तरफ बढ़ीं वो फिसल गई और गिर गई, तेज बारिश हो रही थी तो वो पूरी भीग गईं. गुलशन बावरा के मुंह से निकला, जीनत भीगने के बाद तो और खूबसूरत लग रही हो. यही एक लाइन थी जो आरडी वर्मन को क्लिक कर गई और बोले कि इसी को लिख डालो. तब ये गाना बना और जीनत की इमेज को देखते हुए फिट भी था, काफी सुपरहिट भी हुआ.
 
शोले से ये कब्बाली गायब ही हो गई
 
 
‘’चांद सा कोई चेहरा पहलू में ना हो तो चांदनी का मजा फिर क्या आता है….’’.  ये बोल हैं उस गाने के जो शोले में था, लेकिन बाद में फिल्म की लम्बाई ज्यादा होने के चलते फिल्म से हटा दिया गया. दरअसल ये गाना एक कव्वाली था, जिसके लिए किशोर कुमार, मन्ना डे, भूपेन्द्र सिंह और खुद गीतकार आनंद बक्षी ने गाया था. जिसका म्यूजिक आरडी बर्मन ने तैयार किया था. गाना बाकायदा मस्ती भरे अंदाज में रिकॉर्ड किया गया था. आइडिया ये था कि जेल में ये कव्वाली फिल्माई जाएगी, जिसे अमिताभ, धर्मेन्द्र और कैस्ट्रो मुखर्जी आदि पर फिल्माया जाएगा. ये गाना अगर वाकई में फिल्म में शामिल होता तो कोई इसे सुपरहिट होने से नहीं रोक पाता. लेकिन रमेश सिप्पी को लगा कि ये फिल्म की लम्बाई बढ़ा देगा, इसलिए गाने को रिकॉर्ड करने के बावजूद इसे शूट नहीं किया गया. इस तरह आप एक सुपरहिट कब्बाली से महरूम रह गए और गीतकार आनंद बक्षी गायक बनने से.
 
अमिताभ के इस गाने से दी प्यारेलाल ने अपने गुरु को श्रद्धांजलि
 
 
अमिताभ बच्चन की फिल्म अमर अकबर एंथोनी का ये गाना ‘माई नेम इज एंथनी गोन्साल्वेस’ सुना तो सबने होगा, लोगों को इतना ज्यादा पसंद आया था कि 2007 में इसी टाइटल से एक फिल्म भी बना दी गई. इस गाने का म्यूजिक देने वाले म्यूजीशियन प्यारे लाल का इस गाने से कुछ इमोशनल कनेक्शन था. दरअसल इस गाने के जरिए उन्होंने अपने और अपने पिताजी के गुरू एंथनी गोन्साल्वेस को श्रद्धांजलि दी थी. एंथनी गोवानी थे और मुंबई में उस दौर के जाने माने म्यूजिक अरेंजर थे, जिसने प्यारेलाल को तो वायलिन सिखाया ही था, उनके पिता रामप्रसाद शर्मा ने भी उन्हीं से म्यूजिक सीखा था और आरडी वर्मन ने भी. जब मनमोहन देसाई ने बतौर स्वतंत्र प्रोडयूसर अपनी पहली फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ बनाई तो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी को ही उसमें लिया. जब अमिताभ बच्चन के लिए आनंद बख्शी ने एक गाना लिखा तो उसके बोल थे, ‘माई नेम इज एंथोनी फर्नांडीज’ तो दोनों को ये जमा नहीं, तब प्यारेलाल को अपने गुरू का नाम याद आया. उनको ये भी लगा कि ये मौका है अपने गुरू को श्रद्धांजलि देने का. उन्होंने आनंद बख्शी से कहा कि फर्नांडीज की जगह गोन्साल्वेस कर लो, अब धुन के हिसाब से बोलने में भी ठीक लग रहा था. इस तरह गाने का मुखड़ा हो गया- माई नेम इज एंथनी गोन्साल्वेस…
 
अमिताभ ने कैसे कर दिया अपने बचपन का नाम अमर
 
 
 
अमिताभ बच्चन का जो नाम आप जानते हैं, बहुतों को पता नहीं कि वो उनका असली या पहला नाम नहीं था. अमिताभ बच्चन का पहला नाम इंकलाब श्रीवास्तव रखा गया था. इंकलाब इसलिए क्योंकि वो भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पैदा हुए थे और  उन दिनों इंकलाब जिंदाबाद का नारा बहुत लगाया जाता था. श्रीवास्तव उनके पिता हरिवंश राय का सरनेम था, जब पिता ने अपना नाम हरिवंश राय श्रीवास्तव से हरिवंश राय बच्चन कर लिया तो फिर अगली पीढ़ी ने भी अपना सरनेम बदलकर बच्चन कर लिया, जो अब तक चल रहा है. एक बार सुमित्रा नंदन पंत उनके घर आए तो उन्होंने हरिवंश राय बच्चन को उनके बेटे के लिए नया नाम सुझाया- अमिताभ यानी जिसकी आभा कभी ना मिटे या कम हो. हरिवंश राय बच्चन को ये नाम पसंद आ गया और उन्होंने इंकलाब का नाम बदलकर अमिताभ कर दिया. तो ऐसे बने अमिताभ बच्चन. दिलचस्प बात ये भी है कि अमिताभ ने एक फिल्म भी साइन की, जिसका टाइटल था- ‘इंकलाब’. इस फिल्म में वो एक भ्रष्ट इंस्पेक्टर से नेता बनते हैं और सीएम बन जाते हैं, पहली केबिनिट मीटिंग में सारे नेताओं को गोलियों से भून देते हैं. दिलचस्प बात ये भी है कि ये फिल्म 26 जनवरी 1984 को रिलीज हुई थी, और उसी साल वो असली के नेता बन गए थे, इलाहाबाद से चुनाव जीतकर.
 
6 लेखकों ने लिखी अभिमान
 
 
माना जाता है कि अमिताभ और जया इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड थे, तो कई लेखकों ने इस फिल्म की कहानी में अपना दिमाग लगाया, कुल 6 थे जिनमें राजेन्द्र सिंह बेदी, ब्रजेश चटर्जी नवेन्दु घोष, मोहन एन सिप्पी, बीरेन त्रिपाठी और खुद हृषिकेश मुखर्जी शामिल थे. जहां पहले फिल्म का नाम ‘राग रागिनी’ था तो वो भी बदलकर ‘अभिमान’ कर दिया गया, ताकि कहीं से भी फिल्म म्यूजिक बेस्ड ना लगे, बल्कि सेलेब्रिटी पति पत्नी के बीच अहम की लड़ाई की तरह दिखे. आम तौर पर माना जाता है कि फिल्म किशोर कुमार और उनकी पहली गायक वीबी रूमा के रिश्तों पर आधारित थी. इस फिल्म के लिए हृषिकेश मुखर्जी ने तय कर लिया था कि कहीं से भी मेल सुपरीयोरिटी नहीं झलकनी चाहिए, तो जया की आवाज के लिए जहां उन्होंने लता मंगेशकर को साइन किया तो अमिताभ की आवाज के लिए किशोर कुमार को साइन किया. वो चाहते तो मन्ना डे और रफी को ले सकते थे.  
 
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