मुंबई. एक अप्रैल था. आज कुछ देर पहले ही एक करीबी मित्र ने बेहद दु:खद खबर दी कि प्रत्युषा बनर्जी ने आत्महत्या कर ली है. आज एक अप्रैल है. सुबह से न जाने कितनी ही फर्जी कहानियां सोशल मीडिया पर दौड़ रही थीं.  लगा शायद उन्हीं में से एक होगी. लेकिन कुछ देर में टीवी और सोशल मीडिया पर खबर वायरल हो गयी और कुछ कहते-सुनते न बना.
 
पिछले सितम्बर एक सेट पर प्रत्युषा से मुलाकात हुई थी. एक इवेंट में शूट के दौरान. काफी मृदुभाषी और हंसमुख लड़की थी. क्या जानकारी थी उसकी. आज ऐसी ह्रदय विदारक खबर देकर चली जाएगी, सोचा ना था.
 
धारावाहिक ‘बालिका वधू’ में आनंदी का बेहद सशक्त किरदार निभा चुकी लड़की जो छोटे परदे पर हर समय नारी-सशक्तिकरण की बात करती नज़र आती थी, खुद इतनी नि:शक्त कैसे हो गई कि ऐसा कदम उठाने पर मजबूर हो गई.
 
सुनने में आ रहा है कि ब्वॉयफ्रेंड राहुल राज सिंह से अन-बन के चलते प्रत्युषा तनाव में थी और इसी तनाव में उसने पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली. फिलहाल प्रत्युषा के परिजनों पर क्या बीत रही होगी इसका अंदाज़ा भर ही लगाया जा सकता है. 
 
देखा जाए तो टेलीविज़न इंडस्ट्री से आत्महत्या की ये पहली खबर नहीं है. पिछले महीने ही लोकप्रिय तमिल टीवी एक्टर एस. प्रशांत ने भी इसी तरह खुदकुशी कर ली थी. टीवी एंकर निरोषा ने खुद को ख़त्म कर लिया. फेहरिस्त छोटी नहीं है.
 
24 वर्षीय कन्नड़ अभिनेत्री श्रुति, तेलगू अभिनेत्री दीप्ति (रामा लक्ष्मी), बंगाली अभिनेत्री दिशा गांगुली ने भी अपनी ज़िन्दगी इसी तरह खत्म कर ली. इन सभी आत्महत्याओं की वजह लगभग कॉमन रहीं और वो थीं ‘निराशा’ और ‘कुंठा’ . चाहे वो किसी भी कारण से रही हो. 
 
आज भारतीय टेलीविज़न इंडस्ट्री इतनी बढ़ चुकी है कि यहां हर किसी के लिए अपार संभावनाएं हैं. लाइटमैन से लेकर एक्टर तक, काम की कमी नहीं है. हर साल टीवी इंडस्ट्री लगभग 24 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ रही है और नए आयाम स्थापित कर रही है. क्योंकि ये रोजाना ऑन-एयर होने वाला मामला है, ऐसे में हर काम रोज़ाना ही होता है. एपिसोडिक कहानी से लेकर, स्क्रीनप्ले, डायलॉग, शूटिंग, एडिटिंग और म्यूज़िक तक. ये ऐसी इंडस्ट्री है जहां रुकना और थकना सख्त मना है. 
 
एक वक्त था जब सप्ताह में केवल दो दिन एक धारावाहिक प्रसारित होता था. इसीलिए कहानियों की एक क्वालिटी हुआ करती थी. फिर बढ़ाकर सोमवार से गुरुवार तक प्रसारण हुआ. अब सोमवार से शनिवार और कुछ सोमवार से रविवार तक कर दिए गए हैं. उसी में महासंगम और महा-एपिसोड्स का कान्सेप्ट भी इजाद कर दिया गया.
 
चैनल्स की ‘नंबर वन’  बने रहने की होड़ और प्रोड्यूसर की ज्यादा से ज्यादा कमाई के लालच में अक्सर प्रोडक्शन हाउस में काम करने वालों को इस थकान का ख़ामियाज़ा अपनी ज़िन्दगी और अपनी सेहत से चुकाना पड़ता है. खास तौर पर एक्टर्स को. और अगर वे शो के लीड एक्टर हैं तो कई बार उन्हें केवल 2-3 घंटों के लिए ही सोने दिया जाता है. क्योंकि शूट के बाद शूट लगा रहता है. मेकअप, लाइट और व्यस्त दिनचर्या के चलते बहुत जल्दी ही ये अभिनेता/ अभिनेत्री अपनी उम्र से कई गुना बड़े लगने लगते हैं. 
 
दूसरी ओर देखा जाए तो इस इंडस्ट्री में काम करने वाले अधिकतर एक्टर मुंबई से बाहर के होते हैं. ऐसे में इन्हें न सिर्फ मुंबई जैसे महंगे शहर में अपने खर्चे पर जीना होता है बल्कि इस शहर की जीवनशैली भी अपनानी पड़ती है. उस जीवन शैली में महंगा खाना–कपड़ा से लेकर पार्टियों में जाना और लोगों से संपर्क बनाना भी शामिल है.
 
इस शहर में रहने के लिए आपका काम करना उतना ही ज़रूरी है, जितना सांस लेना. कई सितारे आगे निकल जाते हैं और कई पीछे छूट जाते हैं. जो पीछे रह जाते हैं उनमें कई भयावह कुंठा का शिकार हो जाते हैं. 
 
ये पार्टियों में पीने के बाद अक्सर गले मिलकर या सेट पर ब्रेक के दौरान कोने में रोते हुए मिल जायेंगे. वजह अक्सर दो ही होती हैं. या तो कैरियर उतर चुका है या साथी से अनबन चल रही है. आम तौर पर इंडस्ट्री में लोगों की उम्र काफी छोटी होती है. कुछेक अपवादों को नज़रंदाज़ करें तो लोग दो धारावाहिक के बाद एक्टर को देखना पसंद नहीं करते.
 
यहां रिश्तों की कोई अहमियत नहीं होती. कौन कब किसके साथ है और किसके साथ नहीं है, कहना बेहद मुश्किल है. ऐसे में परेशानियां घेर ही लेती हैं. कुछ परेशानियों से निकल जाते हैं लेकिन कुछ उलझ जाते हैं और एक बुरे अंजाम की ओर बढ़ जाते हैं. 
 
मुंबई अपार संभावनाओं का शहर है. यहां रहने वाला कभी भूखा नहीं सोता लेकिन जितनी तेज़ी से ये शहर देता है उतनी ही तेज़ी से वापस भी ले लेता है. और आप कब फ्रस्ट्रेशन का शिकार हो जाएंगे, आपको हवा भी नहीं लगेगी.
 
मेरे कई दोस्त काम के लिए यहां आने की बात करते हैं और मैं हमेशा उन्हें हिदायत देती हूं कि दूर रहो इस शहर से, खुश रहोगे. क्योंकि दूर से देखने में मुंबई काफी मोहक लगता है लेकिन यहां जीना बहुत मुश्किल है. 
 
प्रत्युषा. तुम्हें पता था इस शहर का खेल. तुम्हें पता था रिलेशनशिप और उसकी उथल-पुथल. तुम लड़ सकती थी. रुक सकती थी. जी सकती थी. तुमने हमें निराशा किया है. जहां गई हो, वहां खुश रहना.
 
श्रद्धांजलि !!