मुंबई. संजय दत्त के फैन्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. संजू बाबा अगले महीने जेल से रिहा हो सकते हैं. सूत्रों की मानें तो उन्हें उन्हें अच्छे व्यवहार और चाल-चलन के कारण सजा पूरी होने से पहले ही रिहा किया जा सकता है.
 
कैसे आ रहे हैं जेल से बाहर?
संजय दत्त को पैरोल उल्लंघन मामले में महाराष्ट्र सरकार ने क्लीन चिट दी. संजय दत्त को पांच साल के सज़ा हुई है जिसकी सज़ा वह पुणे के यरवदा जेल में रहकर काट रहे हैं. वह यरवदा जेल में जाने के पहले 18 महीने की आर्थर रोड जेल में गुज़ार चुके हैं .
 
वह बीच-बीच में  पैरोल के तहत कई बार बाहर भी आए हैं. अब तक पैरोल के तहत संजय दत्त कुल 118 दिन बाहर आ चुके हैं. जब से संजय दत्त जेल में हैं. उनका जेल में रहन-सहन और आचरण काफ़ी अच्छा रहा है. यदि रहन-सहन और आचरण क़ैदी का अच्छा होता है तो जेल मैन्यूअल के हिसाब से उस क़ैदी को हर महीने सज़ा में 7 दिन की माफ़ी मिलती है.
 
उसी हिसाब से संजय दत्त को सज़ा में माफ़ी मिलेगी. दत्त 25 फ़रवरी या मार्च के पहले वीक में जेल से अपनी पूरी सज़ा काटकर बाहर आ जाएंगे. अगर संजय दत्त को सज़ा में उनके आचरण के कारण माफ़ी नहीं मिली होती तो उनकी पांच साल की पूरी सज़ा ऑक्टोबर 2016 में समाप्त होती थी.
 
जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडिया न्यूज़ को बताया कि अभी दिन तय नहीं किया गया है लेकिन फ़रवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के पहले सप्ताह में संजय दत्त की सज़ा पूरी हो जाएगी. दत्त को किसी भी तरह से कोई सज़ा में छूट नहीं दी जा रही है. वह अपनी पूरी सज़ा काटकर ही बाहर आएंगे.
 
कहां है पेंच?
इसमें एक पेंच फंसा हुआ था कि संजय दत्त जब पैरोल पर बाहर आए थे तो उनका दो दिन अधिक हो गया था. इसमें जांच चल रही थी कि क्या संजय दत्त का दोष है. इसी को लेकर यरवदा जेल केदो  जेल अधिकारियों को दोषी क़रार देते हुए इन्हें मेमों दिया गया. संजय के पैरोल पर यह भी सवाल उठाए गए कि जानबूझकर तो दो दिन की देरी तो नहीं की.
 
इस पर गृह राज्य मंत्री  रणजीत पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने संजय दत्त को क्लीन चिट दे दी है. दत्त का इसमें कोई भी दोष नहीं है. इसमें जेल प्रशासन का दोष है. यह बता दें कि अगर इस दो दिनों के लिए दत्त को दोषी क़रार दिया जाता तो उन्हें जेल मैन्यूअल के हिसाब से मिलने वाली सज़ा में माफ़ी का फ़ायदा नहीं मिल पाता. वैसे तो सजा के मुताबिक उन्हें अक्टूबर में रिहा होना था लेकिन नियमों के मुताबिक किसी भी कैदी को 114 दिन पहले कुछ शर्तों के पालन के साथ सजा में छूट दी जा सकती है.
 
बता दें कि 1993 बम धमाकों के बाद संजू बाबा प्रतिबंधित हथियार एके-47 राइफल रखने के दोषी करार दिए गए थे, और उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के तहत 5 साल की सजा सुनाई थी. दत्त को टाडा के तहत आतंकवाद के आरोपों से तो बरी कर दिया गया था, लेकिन बाबरी विध्वंस के बाद मुंबई में फैली सांप्रदायिकता के दौरान अवैध रूप से हथियार रखने का दोषी पाया था.