हांगझोउ. चीन ने आजकल समंदर में आग लगा रखी है. यह बवाल चीन के साउथ चाइना सी पर दावे से उठा है. चीन ने साउथ चाइना सी पर कृत्रिम टापू बनाकर अपना दावा ठोक दिया है. जिसको लेकर अमेरिका समेत दुनिया के कई सारे देश बेहद परेशान हैं. 
 
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साउथ चाइना सी में जिन द्वीपों पर विवाद है वो एक-दो नहीं सात हैं. पहला- स्पार्टली, दूसरा- पार्सेल, तीसरा- प्रज़ाट, चौथा- स्केवरो, पांचवां- वूडी, छठा- मैक क्लैस फील्ड बैंक और सातवां- मिसचीफ रीफ, लेकिन फिलहाल बड़ा बवाल तीन द्वीपों को लेकर है- स्पार्टली, पार्सेल और वूडी. करीब 3200 एकड़ में फैले स्पार्ट्ली द्वीप पर चीन ने कब्जा करके अपना मिलिट्री बेस खड़ा कर चुका है. चीन ने न सिर्फ इन द्वीपों पर बल्कि पूरे इलाके में अपनी फौजी हलचलें बढा रखी हैं.
 
समुद्री मार्ग से होने वाला दुनिया का करीब 70 फीसदी कारोबार साउथ चाइना सी के इसी रूट से होता है. और ये पूरा व्यापार करीब 7 ट्रिलियन डॉलर का है. मुश्किल ये है कि अभी तक तो ये रूट अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत फ्री वॉटर जोन का हिस्सा रहा है, लेकिन अगर चीन स्पार्टली, पार्सेल और वूडी जैसे द्वीपों पर पूरी तरह अपना कब्जा जमा लेता है तो ये पूरा रूट फ्री जोन नहीं रह जाएगा.
 
साउथ चाइना सी का करीब 35 लाख स्क्वॉयर किलोमीटर का इलाका प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम और बाकी के खनिज से भरापुरा है. अमेरिकी अनुमान के मुताबिक इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है. इसलिए चीन इस पूरे इलाके पर अपना कब्जा चाहता है ताकि वो इन प्राकृतिक संसाधनों का भरपूर दोहन कर सके.
 
चीन के हांगझोउ से साउथ चाइना सी विवाद पर देखिए दीपक चौरसिया की EXCLUSIVE रिपोर्ट.