नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने भी याकूब मेमन को फांसी देने को पूरी तरह गलत बताया है. उन्होंने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में स्पष्ट कहा है कि याकूब के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे और उसे फांसी देना सरासर गलत है. काटजू ने यह भी कहा कि भारत में सांप्रदायिक अलगाव बढ़ता जा रहा है ऐसे फैसले उसी को कायम रखने के लिए किये जाते हैं. 

काटजू ने कहा कि देश के 80 से 90 प्रतिशत हिंदू और मुस्लिम भी कम्युनल हो गए हैं और एक-दूसरे से नफरत करते हैं. काटजू ने कहा कि जयादातर हिंदू याकूब की फांसी चाहते थे और ज्यादातर मुस्लिम इसके खिलाफ थे. चूंकि भारत में करीब 80 प्रतिशत हिंदू है इसलिए ऐसा होना तय था. उन्होंने साथ ही कहा कि मेरी इन बातों से सभी हिंदू मुझसे नाराज़ हो जाएंगे लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. 

Indian society has been largely communalized. My guess is that today 80-90% Hindus are communal ( i.e.anti Muslim ) and…

Posted by Markandey Katju on Wednesday, 29 July 2015

पहले भी की थी आलोचना

कुछ दिनों पहले भी काटजू ने कहा था,  ‘याकूब के मामले में न्याय का भद्दा मजाक बना है. जिस सबूत के आधार पर मेमन को दोषी ठहराया गया वह ‘बहुत कमजोर’ है. यह सबूत सह-आरोपी का वापस लिया हुआ बयान और कथित बरामदगी है.’  वापस लिए हुए बयानों के संदर्भ में काटजू ने कहा,  ‘हर कोई जानता है कि हमारे देश में पुलिस किसी तरह से यातना देकर बयान लेती है. यातना ऐसी खतरनाक चीज है जिस कारण कोई कुछ भी कुबूल कर लेगा.’