नई दिल्ली. बीते कुछ दिनों से लगातार ललित मोदी मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे का इस्तीफा मांगा जा रहा है पर वास्तव में क्या ऐसा होगा, ये सवाल हर ओर से उछाला जा रहा है. हालांकि जवाब मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक हाल फिलहाल वसुंधरा का इस्तीफा होना असंभव है. ये तभी हो सकेगा जब इस मामले में वसुंधरा के खिलाफ कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाए. सिर्फ मीडिया के आरोपों के बिना पर मोदी सरकार वसुंधरा पर कार्रवाई करने के मूड में नहीं है. वसुंधरा आलाकमान को अपनी सफाई दे चुकी हैं.

असल में वसुंधरा का इस्तीफा मोदी सरकार के लिए चौतरफा मुसीबत का कारण बना सकता है. एक तरफ इस्तीफा होने पर अगली बारी सुषमा की आएगी और दूसरी तरफ बिहार में उसके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है. आलाकमान किसी सूरत में विपक्ष को कोई भी ऐसा मौका नहीं देना चाहता कि वो एक के बाद एक मंत्रियों पर निशाना साधकर उनका इस्तीफा दिलवा ले. ये सूरत तकरीबन वही है जैसी यूपीए टू के कार्यकाल के दौरान हुई थी. बीजेपी इससे बचना चाहती है.
ऐसा नहीं है कि वसुंधरा के खिलाफ बीजेपी में असंतोष और असहमति नहीं है. केंद्रीय स्तर पर भी उन्हें लेकर आला नेताओं में दो फाड़ हैं लेकिन पार्टी और सरकार को नुकसान के चलते सब फिलहाल वसुंधरा को अभयदान देने के मसले पर एकमत हैं.

ये सही है कि स्थानीय स्तर पर वसुंधरा के खिलाफ छोटे स्तर पर ही सही लेकिन असंतोष तो है. सर्वविदित है कि वसुंधरा की संघ की राजस्थान यूनिट से कभी नहीं बनी लेकिन वो भी ये मानकर चल रहे हैं कि अभी वसुंधरा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने वाली. वसुंधरा के बारे में कहा जाता है कि वो एमपी की सीएम शिवराज की तरह लोगों से आसानी से मिलती नहीं हैं. फिर भी हाल फिलहाल वसुंधरा को स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा विरोध का सामना नजर नहीं आता.