नई दिल्ली. म्यांमार में भारतीय सेना के सफल सर्जिकल ऑपरेशन में अब तक 100 से ज्यादा उग्रवादियों के मारे जाने की खबर है. चंदेल में 18 भारतीय सैनिकों की मौत के बाद भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन को प्लान किया था. म्यांमार की सीमा के अंदर भारतीय सेना द्वारा उग्रवादियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की तैयारी 5 दिन पहले शुरू हो चुकी थी. इस ऑपरेशन के लिए जहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बांग्लादेश का जाने का प्रोग्राम बदल दिया था, वहीं आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग ने भी यूके का दौरा कैंसल कर दिया था.

जानिए भारतीय सेना ने कैसे दिया ऑपरेशन को अंजाम
कमांडोज़ को एयर फोर्स के एमआई 17 वी चॉपर की मदद से उग्रवादियों के ठिकाने के करीब पहुंचाया गया. कमांडो खुफिया एजेंसियों द्वारा पहचानी गई जगहों पर इंटरनैशनल बॉर्डर के करीब 5 किलोमीटर अंदर उतरे और कार्रवाई शुरू कर दी. सूत्रों के मुताबिक इस ऑपरेशन के लिए 20-20 कमांडोज़ की दो टीमें बनाई गई थीं। 45 मिनट तक ऑपरेशन जारी रहा. खास बात यह रही कि इस कार्रवाई में भारत को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ. इस दौरान म्यांमार की सेना लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रही थी.

1990 में हुई थी संधि 
भारत ने साल 1990 में म्यांमार से सीमा पार ऑपरेशन चलाने के लिए एक संधि की थी. ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि वह म्यांमार के संपर्क में थी. स्टेटमेंट में लिखा है, ‘दोनों सेनाओं के बीच सहयोग का इतिहास रहा है. उम्मीद है कि इस तरह के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम उनके साथ आगे भी काम करते रहेंगे.’ सेना ने यह भी कहा, ‘बॉर्डर और बॉर्डर से लगे राज्यों में शांति बनाए रखने के दौरान अगर देश की एकता और सुरक्षा को किसी तरह का खतरा पैदा होता है तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा.’

IANS से भी इनपुट