नई दिल्‍ली. ‘आतंकवादियों को आतंकवादियों से ही खत्म करने’ की अपनी टिप्पणी पर उभरे विवाद से अविचलित रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने जोर देकर कहा है कि वह भारत को सुरक्षित करने के लिए ‘किसी भी हद’ तक जाएंगे और हमला करने वालों को ‘उनकी ही भाषा में जवाब दिया जाएगा.’ पर्रिकर ने रेखांकित किया कि उनकी टिप्पणी से सिर्फ एक देश से तीखी प्रतिक्रिया हुई.

उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि सवाल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी शिविरों पर उनकी प्रतिक्रिया पर था. ‘अत:, प्रतिक्रिया उसपर आधारित थी.’ उन्होंने कहा कि निष्क्रिय करने का मतलब सिर्फ हत्या करना नहीं है, बल्कि आतंकवादियों का पक्ष बदलना और आत्मसमर्पण कराना भी है. रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि उनकी टिप्पणी सामान्य एवं व्यापक संदर्भ में है और किसी खास के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का सिर्फ एक हिस्सा ही चुना गया और उसे उजागर किया गया.

पर्रिकर ने कहा, ‘बुनियादी तौर पर, अगर मुझे अपने देश की हिफाजत करनी है तो मैं किसी भी हद तक जाउंगा..जो भी करना होगा, किया जाएगा. यही बुनियादी उसूल है जो हर किसी का होना चाहिए.’ पर्रिकर ने कहा, ‘अगर कोई मेरे देश को नुकसान पहुंचाता है तो मुझे अग्र-सक्रिय कार्रवाई करनी होगी.. सेना का बुनियादी उद्देश्य यही है कि अगर कोई देश पर हमला करे तो, उसपर जवाबी हमला करो. उसे उसी की भाषा में जवाब दो.’ रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि कोई 13 लाख कर्मियों की मजबूत सेना ‘शांति का प्रवचन’ देने के लिए नहीं रखता.

पर्रिकर ने कहा, ‘किसी भी हद तक जाना मेरा फर्ज है. यह मेरी शपथ है जो मैंने ली है कि मैं संविधान की रक्षा करूंगा. संविधान की रक्षा का मतलब देश की रक्षा है. अत:, स्वाभाविक रूप से, देश की रक्षा के लिए कुछ खास चीजें करनी होंगी. मैं इसे परिभाषित नहीं करूंगा.’ रक्षा मंत्री ने कहा, ‘निष्क्रिय शब्द का मतलब हमेशा हत्या करना नहीं होता. खात्मे का मतलब किसी व्यक्ति का आत्मसमर्पण करना, किसी को किसी के खिलाफ उपयोग करना होता है, यह शांतिपूर्ण माध्यम से भी किया जा सकता है. निष्क्रिय का मतलब वह आपके पक्ष में आए. उसका मतलब खुफियागिरी है.’

IANS