सियोल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक साल में भारत के प्रति दुनिया का नजरिया बदला है. प्रधानमंत्री मोदी ने सियोल में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, “पिछले एक साल में भारत के प्रति दुनिया का नजरिया बदला है. मोदी के संबोधन के दौरान लोग मोदी, मोदी के नारे लगा रहे थे.”

मोदी ने ट्वीट कर कहा, “आज लोग भारत आने के लिए उत्सुक हैं. यही वह रुझान है, जिसमें बदलाव आया है. आखिरकार, लोगों से ही राष्ट्र बनता है. भारत को दुनिया की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है.” मोदी अपने तीन देशों के दौरे के अंतिम पड़ाव के तहत सोमवार सुबह ही दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुंचे हैं.  इससे पहले मोदी ने चीन और मंगोलिया की यात्रा की थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सियोल में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए सोमवार को कहा कि एक साल पहले उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत के प्रति दुनिया के नजरिए में बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति में मानवता केंद्र में है. मोदी ने यहां 1,500 भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति का मुख्य घटक ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ है. इससे पहले, ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ थी. हमने पिछली संप्रग सरकार के दौरान काफी कुछ देखा है. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स देशों में भारत लड़खड़ा रहा था, लेकिन उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है.

मोदी ने कहा, “अर्थशास्त्रियों ने अपना मत बदल दिया है.  पहले वह कहते थे कि ब्रिक्स देशों में ‘आई’ यानी भारत का महत्व समाप्त हो रहा है और इसने लुढ़कना शुरू कर दिया है.” सभी अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों जैसे मूडीज और विश्व बैंक पिछले दो महीने से एक ही सुर अलाप रहे हैं कि भारत विश्व में तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति में मानवता केंद्र में है और जिस तरह से भारत ने नेपाल में भूकंप पीड़ितों की मदद की उससे यह साफ हो जाता है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने यमन से 4,000 भारतीयों को बाहर निकाला. उन्होंने कहा कि इससे पहले विदेश नीति को कारोबार और वाणिज्य से तौला जाता था. 

मोदी ने कहा, “हमने एक नया मार्ग चुना, मानवता का और इसी मानवता को अपनी विदेश नीति के केंद्र में रखा.” उन्होंने कहा कि श्रीलंका की सरकार ने मानवता के आधार पर ही पांच भारतीय मछुआरों की मौत की सजा को माफ कर दिया.

IANS