नई दिल्ली. अमेठी फूड पार्क को लेकर राहुल गांधी और मोदी सरकार में ठनी हुई है. आखिर ठंडे बस्ते में क्यों चला गया अमेठी फूड पार्क? INDIA न्यूज को आदित्य बिड़ला कंपनी की ओर से लिखी गई वह चिट्ठी मिली है. 16 जनवरी 2013 को लिखी इस चिट्ठी से साफ हो रहा है कि कंपनी की मांगों पर तब की यूपीए सरकार ने ध्यान नहीं दिया. 

अमेठी में फूड पार्क लगाने के लिए बिड़ला ने जगदीशपुर के गेल प्लांट से गैस देने की मांग की थी. बिड़ला की चिट्ठी में लिखा है कि अगर उनकी मांगों पर गौर किया गया तो वो फूड पार्क लगाने से पीछे नहीं हटेंगे. मगर सरकार ने इसका कोई जवाब नहीं दिया . अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए राहुल गांधी ने फूड पार्क का मुद्दा उछाला था. लेकिन अब उनका ये दांव उन्हीं के लिए उल्टा पड़ता नजर आ रहा है. 

INDIA न्यूज के पास फूड पार्क लिमिटेड की तरफ से उस समय के खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को लिखी चिट्ठी मौजूद है. इसमें कंपनी ने यूपीए सरकार से सस्ती बिजली मुहैया कराने की बात कही थी. चिट्ठी में फूड पार्क ने लिखा है कि फूड पार्क की कामयाबी बिना रुके पावर सप्लाई की जरूरत होगी. अगर जगदीशपुर में गेल के टर्मिनल प्लांट से हमें पावर की सप्लाई होती है तो ये हमारे लिए सस्ती होगी और साथ ही प्रोजेक्ट की सफलता के लिए भी. हमें ये जानकर निराशा हुई है कि फूड पार्क के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय घरेलू प्राकृतिक गैस मुहैया कराने में सक्षम नहीं है. इसके बजाए हमें LNG बाहर से आयात करनी पड़ेगी. मेरा आपसे निवेदन है कि आप पेट्रोलियम मंत्रालय को कहें कि वो हमें घरेलू गैस उपलब्ध कराने की कोशिश करें ताकि फूड पार्क के लिए सस्ती गैस मिल सके. हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि अगर आप हमारी मांगों पर गौर करते हैं तो हम फूड पार्क को स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.
 
एनडीए सरकार भी ये आरोप लगा रही है कि जब 2010 में फूड पार्क बनाने का काम यूपीए सरकार ने दिया तो कंपनी की मांगों को क्यों नहीं पूरा किया गया? फूड पार्क रद्द किए जाने के फैसले के पीछे मोदी सरकार कांग्रेस को ही कसूरवार ठहरा रही है. और फूड पार्क लिमिटेड की ये चिट्ठी भी इसी ओर इशारा कर रही है. हालांकि कांग्रेस अभी भी अपने पुराने रुख पर कायम है. फूड पार्क को लेकर एनडीए सरकार के साथ 9 जून 2014 को कंपनी के अधिकारियों की बैठक भी हुई. कंपनी ने सरकार को साफ कर दिया गया था कि वो इस हालात में फूड पार्क का काम आगे नहीं बढ़ा सकते हैं. कंपनी अब तक प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 50 एकड़ जमीन का भी अधिग्रहण नहीं कर पाई थी.

IANS से भी इनपुट