पटना. बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर करीब 9.47 लाख वोट बटोर कर NOTA यानी किसी को वोट नहीं ने जीतनराम मांझी की हम, मायावती की बीएसपी, पप्पू यादव की जाप, मुलायम सिंह की सपा समेत सीपीआई माले, सीपीआई, सीपीएम, शिवसेना, एनसीपी, जेएमम और एआईएमआईएम को भी पीछे छोड़ दिया.
 
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत बीजेपी का रहा जिसे 24.4 फीसदी वोट मिले और सीटें 53. सीट कम और वोट ज्यादा को इससे भी समझ सकते हैं कि बीजेपी ने 160 सीटें लड़ी थीं.
 
जबकि लालू यादव के आरजेडी ने महज 18.4 फीसदी वोट के साथ 80 सीटें निकाल ली. लालू की पार्टी 101 सीटों पर लड़ी थी. उसी तरह जेडीयू भी 101 सीटों पर ही लड़ी थी लेकिन उसका वोट प्रतिशत 16.8 फीसदी रहा.
 
बीजेपी, आरजेडी और जेडीयू के बाद निर्दलीय का वोट प्रतिशत सबसे ज्यादा
 
इन तीन पार्टियों के बाद वोट प्रतिशत के हिसाब से निर्दलीय चौथे नंबर पर आए जिन्होंने राज्य भर में 9.4 प्रतिशत वोट बटोर लिए. महागठबंधन के साथ 41 सीटों पर लड़ी काग्रेस ने 6.7 फीसदी वोट के साथ राज्य में पांचवां नंबर पाया. उसके नीचे एनडीए के पार्टनर रामविलास पासवान की एलजेपी को 4.8 फीसदी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी को 2.6 परसेंट वोट मिले.
 
आरएलएसपी के ठीक नीचे वोट प्रतिशत के हिसाब से नोटा वाले वोटर आ गए जिन्होंने 9,47,276 वोट डालकर 2.5 प्रतिशत वोट को किसी को नहीं में दर्ज कराया. बाकी सारी पार्टियां नोटा के नीचे रह गईं.
 
सीपीएम, शिवसेना, एनसीपी, जेएमएम और एआईएमआईएम को 1 परसेंट से भी कम वोट
 
नोटा के नीचे रह गई पार्टियों में जीतनराम मांझी की हम को 2.3 प्रतिशत वोट मिला जो एनडीए के पार्टनर थे. मायावती की बीएसपी को 2.1 फीसदी, दीपांकर भट्टाचार्य की अगुवाई वाली माले को 1.5 फीसदी, सुधाकर रेड्डी की अगुवाई वाली सीपीआई को 1.4 फीसदी, पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी को 1.4 फीसदी और मुलायम सिंह की सपा को 1 फीसदी वोट मिला.
 
बाकी पार्टियों को 1 परसेंट से भी कम वोट मिला. सीताराम येचुरी की अगुवाई वाली सीपीएम को 0.6 परसेंट, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 0.6 परसेंट, शरद पवार की एनसीपी को 0.5 परसेंट, शिबू सोरेन की जेएमएम को 0.3 परसेंट और असदउद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को 0.2 परसेंट वोट मिला.