नई दिल्ली. बिहार चुनाव के अंतिम चरण को देखते चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, संस्थाओं और व्यक्तियों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस दौरान किसी भी तरह के विज्ञापन प्रकाशित न करें. हालांकि चुनाव आयोग ने कहा कि अगर किसी तरह का विज्ञापन छापना हो तो उसके लिए पहले आचार संहिता के लिए राज्य और जिला स्तर पर गठित समिति से मंजूरी ली जाए.
 
 आयोग ने जदयू सांसद केसी त्यागी की ओर से बीजेपी के विज्ञापन के खिलाफ शिकायत दिए जाने के बाद जारी किया है.  आयोग ने अनुच्छेद 324 के तहत यह निर्देश जारी करता है कि सभी राजनीतिक दल, उम्मीदवार, संस्था और व्यक्ति किसी भी तरह का विज्ञापन प्रकाशित कराने के लिए नहीं दे.
 
यदि कोई विज्ञापन दिया जाए तो उसके लिए पहले आचार संहिता के लिए राज्य और जिला स्तर पर गठित समिति से मंजूरी ली जाए. आयोग ने अखबारों को निर्देश दिया है कि कोई भी विज्ञापन 5 नवंबर को तभी छापें, जब समिति की ओर से मंजूरी प्रदान की गई हो.
 
विवाद?
भारतीय जनता पार्टी के नए विज्ञापन पर जदयू नेता केसी त्यागी द्वारा कहा गया है कि यदि चुनाव आयोग बिहार चुनाव के अंतर्गत भारतीय जनता पार्टी के विज्ञापन पर कार्रवाई करने में असमर्थ होता है तो लोग शिकायत करने राष्ट्रपति के पास पहुंचेंगे.
 
इस मामले में जदयू के सांसद और प्रवक्ता केसी त्यागी, कांग्रेस के प्रवक्ता आरपीएन सिंह एवं शोभा ओझा ने चुनाव आयोग को भाजपा के खिलाफ ज्ञापन सौंपा और कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग का संवैधानिक दायित्व है लेकिन उसे बिहार चुनाव में जो निष्पक्षता दिखानी चाहिए थी वह अब तक देखने को नहीं मिली है. चुनाव आयोग की भूमिका से वे निराश हैं.